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बकरी पालन से भूमिहीन किसान भी आर्थिक पोषण संबंधी जरूरत पूरी कर सकता है
बकरीपालनएक बहुउद्देश्यीय व्यवसाय है। इसके जरिए भूमिहीन किसान भी अपनी आर्थिक पोषण संबंधी आवश्यकता की पूर्ति कर सकता है। बकरी को गरीब की गाय कहा गया है। जिससे इस पशु के बहुमूल्य होने का पता चलता है।
यह कहना था जिला पशु रोग अन्वेषण प्रयोगशाला की डॉ. प्रणोती शर्मा का। उन्होंने ग्रामीणों को बकरी पालन की सलाह देते हुए बताया बकरियों को घर के पीछे आंगन में पाला जा सकता है और कम भोजन में ही काम चल जाता है। उसके दूध के अन्य उत्पाद बनाकर किसान बेच सकते हैं। बकरी के दूध में गाय की तरह ही संपूर्ण आहार है। उसमें 3.56 प्रतिशत प्रोटीन होता है।
इसके अलावा कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्निशियम, क्लोरीन, विटामिन आदि उचित मात्रा में होते हैं। बकरी के दूध का वसा मनुष्य के शरीर में कई रासायनिक तत्वों की पूर्ति करता है। अक्सर छोटे बच्चों को मां के दूध के अभाव में बकरी का दूध पिलाया जाता है क्योंकि वह सुपाच्य और कई गुणों से भरपूर होता है। टीबी रक्तचाप के मरीजों के लिए भी यह उपयुक्त है। डॉ. शर्मा के अनुसार पीलिया, पेट के अल्सर, चमड़ी रोग आदि में भी बकरी का दूध उपयोगी होता है।
जिला पशु रोग अन्वेषण प्रयोगशाला की डॉ. प्रणोती शर्मा ने दी ग्रामीणों को सलाह