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केंद्र के अंदर मां और बाहर पिता की हुई परीक्षा
जिला मुख्यालय पर हुई आंगनवाड़ी पर्यवेक्षक सहायिका की पात्रता परीक्षा, साढ़े तीन हजार से अधिक परीक्षार्थी शामिल हुए
भास्करसंवाददाता| झाबुआ
रविवारको शहर में साढ़े तीन हजार से अधिक महिला और युवतियों ने आंगनवाड़ी पर्यवेक्षक एवं सहायिका बनने के लिए परीक्षा दी। नन्हे बच्चों के साथ केंद्रों पर पहुंची महिलाओं के साथ पति की भी अच्छी-खासी मशक्कत हो गई। करीब तीन घंटे तक केंद्र के बाहर पिता अपने बच्चों को पुचकारते नजर आए।
परीक्षा के लिए शहर में 13 केंद्र बनाए गए थे। झाबुआ और आलीराजपुर दोनों ही जिले के अभ्यर्थियों के लिए जिला मुख्यालय पर ही परीक्षा हुई। संख्या अधिक होने से दो शिफ्ट में परीक्षा ली गई। पहली शिफ्ट में सुबह 9 से दोपहर 12.15 बजे दूसरी शिफ्ट में दोपहर 2 से 5.15 बजे तक परीक्षा चली। सुबह की शिफ्ट के लिए 13 केंद्र बनाए गए थे, जबकि दोपहर की परीक्षा दो केंद्रों पर संपन्न हुई। सुबह 9 बजे होने वाली परीक्षा के लिए महिला युवतियां करीब एक घंटे पहले ही केंद्र पर पहुंच गए थे। जोबट से आए कमलेश डूडवे बुनियादी शाला के बाहर अपनी एक वर्षीय बच्ची अनन्या और ढाई साल के मयूर को संभालते दिखे जबकि पेटलावद के विजय हटीला अपनी 15 माह की बेटी विधि को जैसे-तैसे संभाल रहे थे। ऐसे और भी पिता थे, जिन्होंने अपने बच्चों को जैसे-तैसे संभाल कर रखा।
बसों में रही भीड़
आलीराजपुर और झाबुआ दोनों जिले के ज्यादातर परीक्षार्थी बसों में सफर कर मुख्यालय पहुंचे। दोपहर साढ़े 12 बजे बस स्टैंड पर परीक्षार्थियों की भीड़ लग गई, जो भी बस आई दो मिनट में खचाखच भर गई। इस कारण अन्य यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
3895 ने दी परीक्षा
पहली शिफ्ट में 4099 परीक्षार्थी दर्ज थे, जिसमें से 3895 ने परीक्षा दी जबकि 204 अनुपस्थित रहे। इनमें कुछ विद्यार्थी ऐसे भी थे, जिनके पास पहचान पत्र फोटो नहीं था या फिर वे तय समय के बाद केंद्रों पर पहुंचे। दूसरी शिफ्ट में 802 परीक्षार्थी दर्ज थे।
इस तरह बच्चों को केंद्र के बाहर संभालते रहे पिता।
परीक्षा केंद्र के अंदर पर्चा हल करतीं महिलाएं युवतियां।