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मां केंद्र पर रखना चाहती थी कुपोषित बेटी को, ससुर जबरन साथ ले गया

6 वर्ष पहले
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झाबुआ. पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती बच्ची।

सारी सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चे नहीं रुकते। जानकारी सामने आई तो कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब कर ली। भास्कर ने हकीकत जानने का प्रयास किया तो पता चला जागरूकता की कमी के चलते ग्रामीण अपने बच्चों को निर्धारित अवधि तक केंद्र में नहीं रखते।

भास्करसंवाददाता | झाबुआ

एकमां अपनी कुपोषित बेटी को पोषण पुनर्वास केंद्र पर रखना चाहती थी लेकिन उसका ससुर तय समय से पहले ही आकर जबरन साथ ले गया। मामला जिला अस्पताल का है। ग्राम सेमलिया की मड़ीबाई की बेटी आशा की उम्र ढाई साल है और वजन महज 7 किलो 200 ग्राम। 6 फरवरी को उसे जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती किया था। तीन दिन बाद ही मड़ीबाई का ससुर आया और बहू पोती को जबरन ले जाने लगा। केंद्र पर मौजूद कर्मचारियों ने उसे समझाने की कोशिश की फिर भी वह नहीं माना। उसका कहना था घर पर कोई काम करने वाला नहीं है। यह तो केवल एक उदाहरण है। हर महीने इस तरह के केस सामने आते हैं। जिनमें माता-पिता स्वयं चुपचाप बच्चों को लेकर चल देते हैं या फिर मां पर दबाव बनाकर साथ ले जाया जाता है। लिहाजा कुपोषण को खत्म करने के सरकारी प्रयास पूरी तरह सार्थक साबित नहीं हो पा रहे। जनवरी महीने में ही पोषण पुनर्वास केंद्र पर कुल 36 बच्चों को भर्ती किया गया। इसमें से पांच के माता-पिता बिना बताए चुपचाप उन्हें लेकर चलते बने। केंद्र से संबंधित आंगनवाड़ी स्वास्थ्य कार्यकर्ता को सूचना भी भेजी गई, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

ग्रामीणजागरूक नहीं

^कुपोषितबच्चों को लेकर ग्रामीण माता-पिता जागरूक नहीं हैं। उन्हें लगता है कि 15 दिन केंद्र में रहेंगे तो घर पर काम कौन करेगा। मजदूरी का भी नुकसान होगा। ऐसे में वे गुपचुप ही बच्चों को लेकर चले जाते हैं। जबकि भर्ती करने के वक्त ही उन्हें सबकुछ समझाया जाता है। श्रद्धादोफिया, महिला पोषक प्रशिक्षण पेाषण पुनर्वास केंद्र, झाबुआ

झाबुआ. दादी के साथ पोषण पुनर्वास केंद्र पहुंची कुपोषित बच्ची।