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अतिरिक्त आय के लिए किसानों को उन्नत नस्ल के पशु पालन की सलाह
अतिरिक्त आय के लिए किसानों को उन्नत नस्ल के पशु पालन की सलाह
झाबुआ| आदिवासीअंचल में किसान खेती पर ही निर्भर है। ऐसे में उन्हें उतनी अधिक आय प्राप्त नहीं होती। स्थिति को देखते हुए पशु रोग अन्वेषण प्रयोगशाला की डॉ. प्रणोती शर्मा ने किसानों को उन्नत नस्ल के पशुओं का पालने की सलाह जारी की है। उनके मुताबिक अच्छी नस्ल के पशुपालन के साथ उनकी उचित वैज्ञानिक तरीके से देखभाल की जाए तो इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे। डॉ. प्रणोती के अनुसार किसान गोवंश में साहीवाल, थारपारकर, मालवी, निमाड़ी और भैंस में मुर्रा, जाफरावादी सुरती आदि पाल सकते हैं। बकरियों में जमनापरी नस्ल सबसे अच्छी है।
दूधउत्पादन के अनुसार हो आहार
डॉ.प्रणोती ने बताया किसान को दुध उत्पादन के अनुसार पशुओं को उचित आहार देना चाहिए। यदि पशु 5-6 लीटर दुध देता है तो उसे 2-3 किलो पशु आहार, 5-6 किलो सुखा चारा, 20-25 किलो हरा चारा और 50 ग्राम मिनरल मिक्चर देना चाहिए। पशुओं को संक्रामक बीमारी से बचाने के लिए आवश्यक टीकाकरण हर तीन महीने में कृमि नाशक दवाई देने की भी सलाह दी गई। विदेशी संकर नस्ल के पशुओं में रोग प्रकोप की संभावना अधिक रहती है, इसलिए उनके पालन पोषण में विशेष ध्यान देना चाहिए।