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हवा नहीं ला रही ठंड, बढ़ रहा न्यूनतम तापमान

7 वर्ष पहले
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बादलों के छाने से तापमान बढ़ा तो रबी की फसलों में कीट प्रकोप होने के हालात बन गए। स्थिति से किसान चिंता में हैं। लिहाजा कृषि वैज्ञानिकों ने बचाव के लिए सलाह जारी कर दी।

भास्करसंवाददाता | झाबुआ

वर्तमानमें बादल छाये हैं और दिन का तापमान 30 डिग्री या उससे अधिक चल रहा है। इससे चने के साथ सब्जी बैंगन में कीट प्रकोप की संभावना बन गई है। इस बात को स्वयं कृषि वैज्ञानिक भी स्वीकार रहे हैं। स्थिति नियंत्रण के लिए बाकायदा सलाह जारी कर किसानों को कुछ उपाय करने को कहा गया है, जिससे उन्हें नुकसान झेलना पड़े। कृषि विज्ञान केंद्र के पौध वैज्ञानिक डॉ. आरके यादव ने बताया दिन का तापमान 25-28 डिग्री तक रहे तो ठीक है, इससे अधिक होने पर कीट प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है। बादलों के छाने से भी कीटों के लिए माकूल हालात बन गए हैं।

किसफसल में कौन सा प्रकोप

फसल: चना

प्रकोप: इल्लीका

उपाय: प्रकोपकी शुरुआत में टी आकार की खूटियां गाड़ें, जिससे प्राकृतिक रूप से पक्षियों द्वारा इल्ली का नियंत्रण हो सके। फिरोमेन ट्रेप लगाकर फुद्दी पर नियंत्रण किया जा सकता है। साथ ही खेत की मेढ़ पर कचरा पड़ा है उसे जला दें। जिससे फुद्दीयां जलकर खत्म हो जाएंगी। बाद में प्रकोप बढ़ने पर क्यूनॉलफास 40 ईसी या प्रोफेनोफास 50 ईसी दवाई का डेढ़ लीटर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करें।

फसल:सब्जियां

प्रकोप:लालमकड़ी का, सफेद मक्खी और हरा मच्छर

उपाय:नियंत्रणके लिए प्रोपारजाइट डेढ़ लीटर प्रति हेक्टेयर का छिड़काव किया जा सकता है। सफेद मक्खी हरे मच्छर के लिए इमिडाक्लोप्रिड या एसिटामिपिट दोनों में से कोई सी भी दवाई 7 ग्राम प्रति टंकी का छिड़काव करें। नीम तेल का भी उपयोग कर सकते हैं।

फसल:बैंगन

प्रकोप:प्ररोहभेदक इल्ली

उपाय:नियंत्रणके लिए ट्राइजोफास दवाई का 1 लीटर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करें।

(वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. आईएस तोमर के द्वारा बताए गए उपाय )

बादल बढ़े तापमान ने बना दी कीट प्रकोप की संभावना

झाबुआ. बादलों के बीच से सूर्य की किरणें गर्मी का अहसास कराती रहीं।