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भ्रूण हत्या रोकने के लिए कानूनी पहलुओं की जानकारी जरूरी

7 वर्ष पहले
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झाबुआ | मानवअधिकार आयोग स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को जिला प्रशासन के सहयोग से भ्रूण हत्या एक अभिशाप विषय पर कार्यशाला का आयोजन जिला आयोग मित्र समिति द्वारा किया गया।

मुख्य अतिथि जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश डोशी थे। उन्होंने कहा भ्रूण हत्या रोकने के लिए उसके कानूनी पहलुओं के प्रचार-प्रसार करने की आवश्यकता है। जनजागरूकता से भी इस सामाजिक बुराई को दूर किया जा सकता है। इसके लिए सभी सामाजिक संस्थाओं को अपनी जिम्मेदारी समझना होगी। जिला अस्पताल की डॉ. पूर्णिमा गडरिया ने कहा भ्रूण हत्या समाज के प्रति अपराध है। इसे समाप्त किया जाना जरूरी है। लोक सह अभियोजन अधिकारी उमेशसिंह तोमर ने भ्रूण हत्या के कानूनी पहलू इसके दंडात्मक प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डॉ. विक्रांत भूरिया ने सामाजिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा वर्तमान में लड़की को बोझ माना जाता है, इसलिए प्रसव पूर्व जांच करवा कर जन्म से पहले ही भ्रूण हत्या जैसा जघन्य अपराध करते हैं। उन्हें ऐसा करने से रोकना होगा। इसके लिए पूरे समाज को एकजुट होने की जरूरत है। जिला संयोजक आयोग मित्र प्रदीप रूनवाल ने कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर डॉ. सुभाष बर्वे, लोक अभियोजन अधिकारी अनिल चौहान, संकल्प ग्रुप की संयोजक भारती सोनी आदि मौजूद थे। शुरुआत महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। संचालन आयोग मित्र भारती सोनी ने किया। आयोग मित्र मनोज जैन ने कविता भ्रूण हत्या का वाचन करते हुए कहा जब तुम सब रिश्तों की पुजारिन हो तो कैसे अपने ही खून की हत्यारिन हो..के माध्यम से समाज के समक्ष सवाल उठाया।

कार्यशाला में मौजूद लोगों को भ्रूण हत्या रोकने के लिए जानकारी दी गई।

भ्रूण हत्या एक अभिशाप विषय पर कार्यशाला का आयोजन

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