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छात्रों के सुझाव को अमल में लाकर करेंगे स्कूल का विकास
शिक्षा के अधिकार अधिनियम को प्रभावी बनाने के लिए की जा रही व्यवस्था
भास्करसंवाददाता. झाबुआ
स्कूलों के विकास में अब विद्यार्थियों की सलाह भी अहम होगी। उनसे विचार-विमर्श कर ही विकास कार्य को अंजाम दिया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को अपनी जिम्मेदारी का अहसास हो। साथ ही उन्हें सुविधाएं मिल सकें।
शिक्षा के अधिकार अधिनियम को प्रभावी बनाने के लिए अब विद्यार्थियों को भी उसमें शामिल किया जा रहा है। इस दिशा में जिला स्तर पर प्रयास शुरू हो गए हैं। जिले के सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में प्रबंधन समिति का गठन किया गया है। इसके माध्यम से स्कूल की विकास योजना तैयार की जाएगी। खास बात यह है कि समिति को विद्यार्थियों की सलाह लेने के लिए पाबंद किया गया है। योजना बनाते समय इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि स्कूल में क्या-क्या सुविधाएं और संसाधन हैं। कौन से संसाधनों की जरूरत है, इसका आकलन किया जाएगा। स्थानीय समुदाय के साथ विद्यार्थियों की सलाह पर शाला विकास की पूरी योजना तैयार होगी। इसमें शाला का नाम, डाइस कोड, जनशिक्षा केंद्र और ब्लॉक के नाम का उल्लेख रहेगा।
इन बिंदुओं पर बनाई जाएगी विकास योजना
>कक्षोंकी स्थिति क्या है।
>बच्चों के बैठने की जगह पर्याप्त है या नहीं।
>शिक्षकों की संख्या और शाला में उपस्थिति अनुपस्थिति की स्थिति।
>कक्षों में साज-सज्जा की स्थिति।
>शाला के छात्रों के लिए स्वच्छ पेयजल के इंतजाम हैं या नहीं।
पहले यह थी व्यवस्था
राज्यशिक्षा केंद्र से हर साल जारी होने वाले शैक्षणिक कैलेंडर के आधार पर शाला विकास योजना तैयार होती थी। इसमें संबंधित स्कूल के संस्था प्रमुख और जनशिक्षा केंद्र के शिक्षक एसएमसी के बजाय खुद विकास योजना तैयार कर औपचारिकता निभा लेते थे। अब ऐसा नहीं होगा। स्कूल के छात्र-छात्राओं से हर मुद्दे पर चर्चा कर विकास योजना तैयार करना पड़ेगी।