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महिला संबंधी अपराध के 85 प्रतिशत मामलों में पीड़िता गवाह मुकरे
दिल्ली गैंगरेप की घटना के बाद देशभर में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाने की मांग उठी। सरकार ने कड़े कदम उठाए भी, लेकिन जब मामला न्यायालय में जाता है तो गवाह मुकर जाते हैं, जिससे आरोपी बरी हो जाते हैं
भास्करसंवाददाता | झाबुआ
बलात्कारछेड़खानी के 85 फीसदी मामलों में पीड़िता ने ही अपना बयान बदल दिया तो गवाह भी मुकर गए। ऐसे में आरोपी सजा से बच गए। स्थिति को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने जिला लोक अभियोजक को चिट्ठी लिखकर बयान से मुकरने वाली फरियादी और गवाहों के खिलाफ धारा 344 के तहत कार्रवाई के लिए न्यायालय में आवेदन लगाने को कहा है। इससे झूठे आरोप लगाने बयान से मुकरने वालों पर शिकंजा कसेगा।
जिले में 6 साल के भीतर ज्यादती के 117 प्रकरण दर्ज हुए। इनमें से 97 में पीड़िता और गवाह दोनों ने बयान बदल लिए और आरोपी को पहचानने से इनकार कर दिया। इसी तरह छेड़खानी के 115 प्रकरणों में से 98 में आरोपी सजा से सिर्फ इसलिए बच गए, क्योंकि फरियादी अपने ही आरोप से मुकर गई। बार-बार फरियादियों के बयान बदलने से पुलिस भी परेशान है, क्योंकि उनके द्वारा महिला संबंधी अपराधों में प्राथमिकता से कार्रवाई की जाती है
क्या है धारा 344
कार्रवाई से नहीं पलटेंगे फरियादी
भांजगड़ी एक बड़ी वजह
बलात्कार छेड़खानी के प्रकरणों में पीड़िता और गवाहों के पक्षद्रोही होने की एक बड़ी वजह जिले में प्रचलित भांजगड़ी प्रथा है। यहां कई बार दबाव बनाने लिए भी झूठे प्रकरण दर्ज करा दिए जाते हैं। बाद में ग्रामीण आपस में बैठकर लेनदेन कर लेते हैं। जब सौदा तय हो जाता है और पीड़ित पक्ष को निश्चित रकम मिल जाती है तो न्यायालय में वह अपने बयान से बदल जाती है।
झूठी गवाही या साक्ष्य देने के आरोप में संबंधित के विरुद्ध धारा 344 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें तीन माह का कारावास और 500 रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है।
पुलिस अधीक्षक एसपी सिंह कहते हैं यदि पीड़िता फरियादी पर कार्रवाई होगी तो वे बलात्कार छेड़खानी जैसे गंभीर मामलों में अपना बयान नहीं बदलेंगे। इसी को ध्यान में रखकर जिला लोक अभियोजक को धारा 344 में कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा है।
वर्ष ज्यादती छेड़खानी
2009 16 11
2010 21 09
2011 31 14
2012 22 23
2013 06 15
2014 01 26
योग 97 98
(स्त्रोत:पुलिस अधीक्षक कार्यालय)