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250 आदिवासी परिवारों को नहीं मिल रहा गेहूं-केरोसिन

7 वर्ष पहले
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सरपंच बोले-जानबूझकर परेशान कर रहे हैं कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी।

भास्करसंवाददाता|कैलारस

साहब!ग्राम पंचायत द्वारा दो माह पूर्व राशन कार्ड पर पात्रता पर्चियां चस्पा कर हमें दे दी गईं। इसके बाद पात्रता पर्चियों पर हस्ताक्षर कराने फूड इंस्पेक्टर के पास कई बार गए। लेकिन वे हर बार टाल देते हैं। उनका कहना है कि गांव आकर सचिव से वेरिफाइ कराकर पात्रता पर्चियों पर हस्ताक्षर कर दूंगा। लेकिन वे अब तक तो गांव आए और ही उन्होंने हस्ताक्षर किए हैं। ऐसे में गरीब लोगों को बाजार से अथवा बड़े किसानों से महंगे दामों पर गेहूं, चावल, केरोसिन खरीदना पड़ रहा है।

यह बात राशन नहीं मिलने से परेशान बहरारा जागीर के आदिवासी, रामबरन, लक्ष्मी, कल्ला, तेजा, अजुद्धी रामहेत, पप्पू ने रविवार को भास्कर को बताया कि इस संबंध में हमने कई बार पंचायत सरपंच से कहा। उन्होंने जनपद पंचायत पहुंचकर सीईओ से शिकायत भी की, लेकिन समस्या का समाधान अब तक नहीं हुआ। ग्रामीणों ने अपने राशनकार्ड दिखाते हुए बताया कि दो माह पूर्व बहरारा जागीर पंचायत द्वारा 250 राशनकार्डों पर पात्रता पर्चियां चस्पा कर आदिवासी परिवारों को वितरित कराई गईं। लेकिन उन पर कनिष्ठ खाद्य आपूर्ति अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं होने से सेवा सहकारी संस्था मामचौन द्वारा राशन नहीं दिया जाता। उन्होंने बताया कि पुराने राशनकार्ड जमा हुए चार माह हो गए। दो माह बाद हमें नए राशन कार्ड भी मिल गए, लेकिन जब इन राशनकार्ड पर राशन ही नहीं मिल रहा, तो हम इसका क्या करें। परेशान आदिवासियों ने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप कर कार्रवाई करने की मांग की है।

कैलारस। राशनकार्ड दिखाते बहरारा गांव के आदिवासी।

नहीं किया फोन रिसीव

250आदिवासी परिवारों की पात्रता पर्चियों पर हस्ताक्षर करने के बारे में कनिष्ठ खाद्य आपूर्ति अधिकारी सुनील राठौर का पक्ष जानने उनके मोबाइल नंबर 7747005107 पर कई बार संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

चक्कर लगवा रहे हैं आपूर्ति अधिकारी

^हमारीपंचायत में जनपद पंचायत द्वारा कुल 600 बीपीएल राशनकार्ड जारी किए गए हैं। जिनमें से 350 परिवारों को ही खाद्यान्न लाभ मिल रहा है। 250 आदिवासी परिवार ऐसे हैं जिनको पात्रता पर्चियों पर हस्ताक्षर करने के नाम पर कनिष्ठ खाद्य आपूर्ति अधिकारी लंबे समय से टहला रहे हैं।\\\'\\\' जगन्नाथसिंह गुर