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सीएम साहब! तीन साल पहले किए वायदे अब तक नहीं हुए पूरे

5 वर्ष पहले
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विशेषज्ञ डॉक्टर, प्रोफेसरों के पद रिक्त पड़े हैं, वहीं पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं नगरवासी

विजय गुप्ता|जौरा

आपको याद होगा कि जौरा में वर्ष 2012 में किसान सम्मेलन आयोजित हुआ था। इस सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण स्वयं मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रहे। इस दौरान सार्वजनिक मंच को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने जनता के बीच सरकारी कॉलेज में संकाय बढ़ाने, नगर की पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने, अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की पदस्थापना करने की घोषणा की थी। वर्तमान में इन घोषणाओं को हुए तीन साल का समय गुजर गया है। लेकिन जौरा नगर के लोगों मुख्यमंत्री द्वारा की गई इन घोषणाओं का लाभ अब तक नहीं मिला है। यहां तक कि जौरा विधानसभा क्षेत्र के किसानों के हित में कैलारस शक्कर कारखाना भी शुरू नहीं हुआ।

प्रोफेसर के पद रिक्त, अस्पताल में डॉक्टर नहीं

तात्कालीन विधायक एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीराम धाकड़ ने किसान सम्मेलन के दौरान नगर की विभिन्न समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने सरकारी कॉलेज में रिक्त पड़े प्रोफेसर के पदों को भरने के साथ स्नातकोत्तर का दर्जा दिलाने की बात भाषणों में कही गई थी। इसके अतिरिक्त सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने का आश्वासन दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी सरकारी कॉलेज में आठ प्रोफेसरों के पद खाली हैं तथा स्नातकोत्तर डिग्री के लिए छात्र-छात्राओं को मुरैना व ग्वालियर जाना पड़ रहा है। इसी प्रकार सरकार अस्पताल में हड्डी रोग, नेत्र रोग, ईएनटी, मेडिसिन व एनेस्थीसिया विशेषज्ञ नहीं हैं। ऐसी स्थिति में गंभीर मरीजों को निजी क्लीनिकों पर महंगे दामों पर इलाज कराना पड़ रहा है।

कैलारस शक्कर कारखाना भी शुरू नहीं हुआ
जौरा विधानसभा क्षेत्र के किसानों ने किसान सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री से कैलारस शक्कर कारखाना चालू करने के मांग की थी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों की उन्नति करने का आश्वासन देते हुए शीघ्र ही शक्कर कारखाना चालू कराने का आश्वासन दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा के तीन साल बाद भी शक्कर कारखाना शुरू नहीं हुआ। जबकि शक्कर कारखाना बंद होने से जौरा विधानसभा क्षेत्र के किसानों की आर्थिक प्रगति प्रभावित है।

जौरा-अलापुर में पानी के लिए जद्दोजहद करते हुए ग्रामीण।

पानी की समस्या से जूझ रहे 50 हजार की आबादी
किसान सम्मेलन के दौरान नगर से सटे अलापुर के लोगों ने पानी की समस्या का मुद्दा उठाया था। इस पर मुख्यमंत्री द्वारा पगारा डेम से पानी लाकर नगर की पेयजल समस्या दूर करने की घोषणा की गई थी। मुख्यमंत्री की इस योजना पर अमल भी हुआ, लेकिन रफ्तार इतनी धीमी रही है कि जौरा नगर के लोग वर्तमान में पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। सबसे ज्यादा खराब हालात अलापुर के हैं। जहां दिनभर सरकारी हैंडपंप पर पानी भरने वालों की भीड़ लगी रहती है।

समस्या से कोई सरोकार नहीं
मुख्यमंत्री सहित भाजपा के नेता घोषणावीर हैं। जनता की समस्याओं से उनका कोई सरोकार नहीं है। मनीराम धाकड़, पूर्व विधायक जौरा

अधिकारियों को पत्र भेजे है

प्रोफेसरों के रिक्त पद एवं पीजी कक्षाएं शुरू करने कई बार उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजे गए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। वसुंधरा गोयल, प्राचार्य डिग्री कॉलेज जौरा

विभाग योजना शुरू नही की

अलापुर में पेयजल की समस्या गंभीर समस्या है, क्योंकि यहां स्वीकृत नलजल योजना को पीएचई विभाग द्वारा अब तक शुरू नहीं किया गया है। नसीम कुर्रेशी, सरपंच अलापुर

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