तेजी से बढ़ रहा तापमान सरसों में माहू का प्रकोप
किसानों के लिए नुकसान, माहू के आने से पैदावार घट जाएगी
भास्कर संवाददाता | मुरैना
फरवरी माह के शुरूआत से अब तक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। जिसके कारण सरसों की फसल को संकट पैदा हो गया है। क्योंकि बढ़े हुए तापमान में माहू कीट ने सरसों की फसलों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। ऐसे में जिले में सरसों की खेती पर बुरा असर पड़ रहा है। माहू यूं तो हर साल आता है, लेकिन इस वर्ष यह समय से पहले आ गया है, क्योंकि इस बार सर्दी के सीजन में गर्मी बढ़ रही है। कृषि वैज्ञानिक मानते हैं कि माहू का आना बढ़े हुए तापमान के कारण हुआ है, जिससे बचाव के लिए किसानों को खेतों में कीटनाशक दवा का छिड़काव करना चाहिए।
इस वर्ष सर्दी का सीजन नवंबर माह से शुरू हो पाया, जिसमें सरसों की फसल किसानों ने ज्यादा बोई। क्योंकि सरसों इस जिले की प्रमुख फसल है। किसानों ने यहां 1.30 लाख हैक्टेयर में सरसों की फसल बोई। जिस पर माहू कीट ने तापमान बढ़ने से हमला बोल दिया है। आजकल मुरैना ब्लॉक समेत जौरा, कैलारस, सबलगढ़, अंबाह, पोरसा, दिमनी, सिहोनियां, खड़ियाहार, रामपुरकलां, टेंटरा, सुजरमा, बानमोर, नूराबाद, सुमावली व रिठौराकलां इलाके में सरसों के खेतों में माहू का प्रकोप देखा जा रहा है।
धूप से बढ़ रही माहू : आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र के सह संचालक डा.एसएस तोमर कहते हैं कि माहू कीट की बढ़वार धूप होने से होती है। क्योंकि सर्दी के सीजन में धूप इस कीट के लिए बढ़वार का अनुकूल मौसम होता है।
यह नुकसान करता है माहू कीट: कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि माहू कीट सरसों के पौधे में तने से रस चूसता है। साथ ही यह पत्तों व फलियों समेत फूलों का रस भी चूस लेता है। जिसका असर दाने पर पड़ता है। क्योंकि फली पूरी तरह रंगत विहीन होकर मर जाती है और तब दाना सही नहीं बन पाता। जिससे पैदावार कम हो जाती है।
यह दवा खेतों में छिड़कें किसान: कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक माहू के कंट्रोल के लिए डायमेथोएट दवा का छिड़काव सरसों की फसल पर किया जाता है। जिसमें एक बीघा में 100 लीटर पानी में 150 मिली लीटर दवा मिलाकर छिड़काव किया जाता है।
करोड़ों करोड़ माहू एक दिन में पैदा होते हैं
माहू कीट सरसों के लिए बहुत खतरनाक है। क्योंकि एक कीट एक दिन में 80 हजार बच्चे पैदा कर देता है। फिर वे 80 हजार भी 80-80 हजार कीट पैदा करते हैं। एक खतरनाक बात ये है कि यह कीट पहले अंडे से पैदा होता है, लेकिन बढ़े हुए तापमान में यह सीधे बच्चे ही पैदा करने लगता है। जिससे करोड़ों करोड़ माहू एक दिन में पनपते हैं। डा.एसएस तोमर, सह संचालक आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र मुरैना
सरसों के पौधों में लगी माहू।