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गांव की कमान अब पढ़े-लिखों के हाथ

6 वर्ष पहले
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लोकेश डिंगोरिया/ इसरार कुरैशी | नागदा/उन्हेल

त्रिस्तरीयपंचायत चुनाव में मतदाताओं का झुकाव पढ़े-लिखों के पक्ष में रहा। परिवार जातिवाद की जकड़न को तोड़ ग्रामीणों ने उन लोगों के हाथ ग्राम सरकार की कमान सौंपी है, जो उच्च शिक्षित होने के साथ विकास के लिए प्रतिबद्ध हो। पंच पद के सामने आए परिणामों में खाचरौद जपं की 130 पंचायतों में 5 प्रतिशत ग्रेजुएट, प्रोफेशनल सहित 30 प्रतिशत शिक्षित युवाओं को नेतृत्व का मौका दिया। परिणामों में नजर आई लोगों की बदली सोच सियासी गलियारों के लिए भी संकेत है अब नेतृत्व का अधिकार उसे ही, जो योग्य हो।

हिम्मतलाल चौधरी

ज्ञानेंद्रसिंह डोडिया

बद्रीलाल पाटीदार

शाहनवाजउद्दीन

दिनेश चौधरी

गोपाल मकवाना

सर्वसुविधायुक्त अस्पताल बनवाना ताकि ग्रामीणों को उचित इलाज मिल सके। साथ ही ग्रामीणों को शहरों की ओर रुख करने से निजात मिलेगी।

35 वर्षीय गोपाल बीए उत्तीर्ण। ग्राम पंचायत घिनौदा से सरपंच बने।

गांव को आदर्श ग्राम बनाना। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर ग्राम में ही विकसित कर ग्राम का संपूर्ण विकास करना। तािक युवा भटके नहीं।

28 वर्षीय दिनेश बीए उत्तीर्ण। ग्राम पंचायत ऊंचाहेड़ा से सरपंच बने।

परदा प्रथा को समाप्त कराना। गांव की प्रत्येक महिलाओं बेटियों को शिक्षित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना। तािक उन पर कोई अत्याचार नहीं कर सके।

बीएससी पास 39 वर्षीय शाहनवाज उद्दीन शेख झिरन्या शेख से निर्विरोध।

बागेड़ी नदी पर डेम निर्माण कर किसानों को आर्थिक रूप से संपन्न बनाना। किसानों को पेयजल और सिंचाई के लिए किसी अन्य का मुंह नहीं देखना होगा।

46 वर्षीय ब्रदीलाल बीए द्वितीय वर्ष। ग्राम पंचायत पाड़सुत्या से सरपंच बने।

ग्रामीणों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाकर उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम करना। ग्रामीणों को दफ्तरों के चक्कर लगाने नहीं पड़ेंगे।

40 वर्षीय ज्ञानेंद्रसिंह पेशे से अभिभाषक। ग्राम पंचायत कुंडला से सरपंच बने।

पंचायत को नंबर वन बनाना ही सपना है। इसके लिए योजनाओं का लाभ समान रूप से दिलाना, शिक्षा पर जोर देना। निर्माण कार्यों को लेकर ग्रामीणों से चर्चा।

34 साल के हिम्मत लाल बीए उत्तीर्ण। ग्रापं भाटीसुड़ा से सरपंच बने।