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सालाना 12 लाख रुपए शिक्षा उपकर फिर भी किचन में कक्षाएं, टपक रही छत

4 वर्ष पहले
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शिक्षा उपकर से शिक्षकों-विद्यार्थियों के सम्मान का प्रस्ताव स्कूलों की दशा सुधारने की सुध नहीं

लोकेश डिंगोरिया | नागदा

शहर के शासकीय स्कूलों की छत बारिश में टपकना शुरू हो गई है। हाल यह है कि बच्चों को बैठने की जगह नहीं है। कहीं किचन शेड में कक्षा लग रही है तो कहीं छज्जा टूटने से कक्षाएं ही नहीं लग पा रही है। मैंटेनेंस के अभाव में छज्जे टूटने से बच्चों के साथ दुर्घटना का भय बना हुआ है। बावजूद इन्हें दुरुस्त करने का ख्याल अभी तक नगर पालिका को नहीं आया है। जबकि नगर पालिका शहर के 16 स्कूलों के मैंटेनेंस के नाम पर प्रतिमाह संपत्ति कर में शिक्षा उपकर की राशि भी वसूलती है। खास बात यह है कि शिक्षा उपकर के मद में मिली राशि से स्कूलों का मैंटेनेंस करना भूलकर नपा शिक्षकों व विद्यार्थियों के सम्मान की तैयारी कर रही है। जबकि नपा को पहले जिस मद में राशि मिली है उसके तहत मैंटेनेंस कराना चाहिए ताकि बारिश में बच्चों को परेशान न होना पड़े। भास्कर ने शहर के स्कूलों की व्यवस्था देखी तो हालात सामने आए।

पाड़ल्याकलां प्राइमरी स्कूल की कक्षा में बैठकर भोजन करते बच्चे।

पांच हजार लोग दे रहे टैक्स
नगर पालिका से मिली जानकारी के मुताबिक संपत्ति कर का 1 प्रतिशत राशि शिक्षा उपकर के रूप में ली जाती है। 5 हजार लोगों द्वारा संपत्ति कर जमा किया जाता है। प्रतिवर्ष नपा को लगभग 12 लाख रुपए शिक्षा उपकर के रूप में मिलते हैं। जिसका उपयोग नपा को स्कूलों के मैंटेनेंस, साफ-सफाई व्यवस्था सहित अन्य शिक्षा संबंधित कार्यों पर करना होता है।

आवेदन करने के बाद भी मैंटेनेंस नहीं होता
नपा व ग्राम पंचायत द्वारा शिक्षा उपकर की राशि संपत्ति कर के साथ ली जाती है। शहर में नपा व गांव में पंचायत को स्कूलाें का मैंटेनेंस करना होता है। लेकिन आवेदन करने के बाद भी जब मैंटेनेंस नहीं होता है तो विभाग को अपने मद से राशि खर्च करना पड़ती है। - प्रणव कुमार, बीआरसी, शिक्षा विभाग खाचरौद

शिक्षा उप कर की राशि से स्कूलों का मैंटेनेंस कराया जाता है। स्कूल संचालक नगर पालिका में नए सिरे से आवेदन करें, संबंधित स्कूलों का मैंटेनेंस कराया जाएगा। - सज्जनसिंह शेखावत, उपाध्यक्ष, नपा नागदा

अतिरिक्त कक्ष को छोड़कर सभी में रिस रहा पानी
पाडल्याकलां के प्राइमरी स्कूल में 2010 में बने अतिरिक्त कक्ष को छोड़कर सभी कक्षाओं में बारिश का पानी रिस रहा है। प्रभारी प्रधानाध्यापिका सुमन पाेरवाल ने बताया पहली से 8वीं के 157 बच्चों की बैठक व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। फिर भी बच्चों को परेशानी न हो इसलिए पहली कक्षा को किचन शेड में लगा रहे हैं। थोड़े समय पहले तो बिजली भी नहीं थी। हम सभी शिक्षकों ने पैसा जमा कर बिजली कनेक्शन लिया। अब बिल भी हमारे पैसों से ही भरते हैं।

अधिकारी निरीक्षण करके गए पर कार्रवाई नहीं
कन्याशाला चौराहा स्थित प्राइमरी स्कूल के 5 रूम में दो की हालत खस्ता होने से इन्हें बंद कर दिया गया है। प्रधानाध्यापिका लीलावती राठौर ने बताया बारिश में बीते 17 जुलाई को एक कमरे का छज्जा टूट गया। पास वाले रूम की छत से पानी रिसने से दोनों कमरों में बच्चों को नहीं बैठाया जा रहा है। राठौर बोली छज्जा टूटने की सूचना अधिकारियों को देने पर अधिकारी भी निरीक्षण करके गए हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। शुक्रवार को भी एक कक्षा से छज्जा टूटकर गिर गया। ऐसे में कभी भी बच्चों के साथ हादसा हो सकता है।

भवन बनने के बाद एक बार भी नहीं हुई मरम्मत
चंबल सागर मार्ग स्थित प्राइमरी स्कूल प्रधानाध्यापक रामसिंह खराड़िया से स्कूल भवन के बारे में जानकारी लेने पर पहले उन्होंने स्कूल की छत रिसने से इनकार कर दिया। शंका होने पर जब हमने खुद कक्षाएं देखी और शिक्षकों से पूछा तो उन्होंने कुछ कक्षाें से पानी रिसने की बात कही। शिक्षकों ने बताया वर्ष 2001 में स्कूल का भवन बनने के बाद एक भी बार इसकी मरम्मत नहीं हुई। पानी रिसने की दशा में दो कक्षाएं एक साथ लगाते हैं।

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