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जनपद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद को लेकर उठा-पटक तेज

6 वर्ष पहले
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जनपदपंचायत चुनाव के प्रथम चरण के नतीजे सामने आने के बाद जनपद पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर उठापटक तेज हो गई है। अध्यक्ष के साथ ही उपाध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने के लिए जीतने वाले जप सदस्यों ने जोड़तोड़ शुरू कर दी है। हालांकि जपं में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्वाचन के लिए प्रथम सम्मेलन का आयोजन 4 मार्च को होना है, लेकिन अभी से दावेदारी प्रस्तुत कर संगठन को अपने पक्ष में करने में कोई पीछे नहीं रहना चाह रहा है। 25 सदस्यों के बीच से ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव किया जाना है। जिसके चलते भाजपा और कांग्रेस के नेताओं द्वारा सदस्यों को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान दोनों प्रमुख दलों द्वारा अध्यक्ष पद पर अपने समर्थक को काबिज के लिए रणनीति बनाई जा रही है।

भाजपाका काबिज का दावा

जपंखाचरौद में भाजपा पार्टी समर्थित 15 उम्मीदवारों के जीतने का दावा किया जा रहा है। इन सदस्यों के सहारे ही भाजपा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद पर काबिज होने को लेकर आश्वस्त नजर रही है। भाजपा ने जपं अध्यक्ष पद को लेकर कोई उठापटक हो इसके लिए अभी किसी भी जप सदस्य का नाम अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए अधिकृत घोषित नहीं किया है। साथ ही यह संकेत भी दिया है कि उसके पास बहुमत है और जप पर इस बार फिर से भाजपा ही काबिज होगी।

कांग्रेसभी लगा रही जोर

कांग्रेसपार्टी भी जपं पर कब्जा जमाने के लिए पूरजोर प्रयास कर रही है। सूत्रों के अनुसार पार्टी समर्थित तथा निर्दलीय जप सदस्यों को एकजुट कर अध्यक्ष का उम्मीदवार चुन लिया जाए। वहीं अधिकांश सदस्यों द्वारा पार्टी समर्थित उम्मीदवार को सहयोग देने का भरोसा दिलाया जा रहा हैं।

दावेदारों में टकराव

जपंमें अध्यक्ष पद की कुर्सी पर काबिज होने के लिए भाजपा समर्थित सदस्यों में टकराव के आसार बन रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि अध्यक्ष पद के लिए जप सदस्य बनबना की प्रेमबाई मदन और नरसिंहगढ़ की श्यामूबाई रमेश दोनों के नाम प्रमुख हैं। इन दोनों नामों में से किसी एक का नाम फाइनल कर दिया जाएगा। वही उपाध्यक्ष पद के लिए एकमात्र भाजपा के ग्रामीण मंडल अध्यक्ष लालसिंह सिसौदिया का नाम लगभग तय समझा जा रहा हैं। इसके अलावा भी अन्य समर्थक भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने का मन बना रहे हैं। जिससे पार्टी में टकराव की स्थिति बन रही है। भाजपा में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को लेकर टकराव का लाभ कांग्रेस उठाने का प्रयास कर रही है।