सरपंच-उपसरपंच को शौचालय बनवाने सात दिन की मोहलत
ग्राम पंचायतों के सरपंच-उपसरपंचों को एसडीएम ने अपने घर पर शौचालय निर्माण कार्य सात दिन में शुरू करने का नोटिस दिया है। नोटिस में उन्होंने सात दिन में शौचालय निर्माण कार्य शुरू नहीं करने पर पद से पृथक करने की चेतावनी भी दी है। इस पर कई पंचायतों के सरपंच व उपसरपंच ने अपने यहां शौचालय का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है।
सिंहस्थ के मद्देनजर प्रशासन प्रत्येक गांव में शौचालय निर्माण करने पर जोर दे रहा है। इसके लिए बाल हठ, राज हठ व महिला हठ का अभियान भी चला रहा है, ताकि ग्रामीण जागरूक हो और वह बच्चों, राजनेताओं व महिलाओं की जिद के आगे नतमस्तक होकर शौचालय का निर्माण करें। इससे ग्रामीण खुले में शौच की प्रवृत्ति से दूर हो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना स्वच्छ भारत भी पूर्ण हो। लेकिन जनपद पंचायत के कई जनपद सदस्य, सरपंच, उपसरपंच व पंचों के घर ही शौचालय का निर्माण नहीं हुआ है। ऐसे में जब वह स्वयं ही जागरूक नहीं हो रहे हैं तो ग्रामीणों को किस तरह जागरूक करेंगे। इसके लिए जनपद पंचायत द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची पर एसडीएम अशोक व्यास ने 8 फरवरी को सरपंच व उपसरपंच को सात दिन में शौचालय निर्माण शुरू करने का नोटिस दिया है। साथ ही सात दिन में शौचालय निर्माण शुरू नहीं करने पर पद से पृथक करने की चेतावनी भी दी है। इस पर कई जनप्रतिनिधियों ने शौचालय निर्माण कार्य शुरू कर दिए हैं। नोटिस में दी गई समयावधि में दो दिन ही शेष है। इसके बाद जनप्रतिनिधियाें के निवास का निरीक्षण अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। अगर संबंधित जनप्रतिनिधि ने शौचालय का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया होगा तो उस पर पंचायत अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
हितग्राहियों को समय पर नहीं हो रहा भुगतान
अधिकारी शौचालय निर्माण के लिए जागरुकता अभियान चला रहे हैं। वहीं दूसरी ओर हितग्राही भुगतान नहीं होने से परेशान हो रहे हैं। ग्राम पंचायत रतन्याखेड़ी में हितग्राहियों ने शौचालय निर्माण पूर्ण कर लिए हैं। पूर्णता प्रमाण पत्र के साथ ही सभी दस्तावेज भी पंचायत के माध्यम से भेजे गए। लेकिन अभी तक हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि नहीं मिल पाई है। पूर्व सरपंच अर्जुनसिंह पंवार के मुताबिक जनपद पंचायत में कई पंचायतों में यहीं स्थिति बनी हुई है। ऐसे में जागरुकता लाने के बाद भी हितग्राही हतोत्साहित हो रहे हैं और शौचालय निर्माण करने से पीछे हट रहे हैं।
एक साल में कराना होता है शुष्क शौचालय का निर्माण
मप्र पंचायतराज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 36 के तहत ग्राम पंचायत में निर्वाचित होने के बाद जनप्रतिनिधि को एक साल के अंदर अपने मकान में शुष्क शौचालय का निर्माण कराना अनिवार्य होता है। अगर एक साल बाद भी वह शुष्क शौचालय का निर्माण नहीं करता है तो उसे धारा 36 के तहत नोटिस देकर अयोग्य घोषित किया जा सकता है। गौरतलब है कि ग्राम पंचायत के चुनाव को भी एक साल बीत चुका है। ऐसे में अगर सभी नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने अपने मकान पर शुष्क शौचालय का निर्माण नहीं किया है तो उक्त धारा के तहत उन पर कार्रवाई की जा सकती है।
सरपंच-उपसरपंच को नोटिस जारी किए गए हैं। इसमें उन्हें शौचालय निर्माण करने की बात कही गई है, ताकि उन्हें देखकर ही ग्रामीण जागरूक हो और वह भी अपने यहां शौचालय का निर्माण करें। अशोक व्यास, एसडीएम, खाचरौद