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जांच में फिर पेंच, आज दोबारा निरीक्षण

5 वर्ष पहले
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जपं सीईओ की गोलमाल रिपोर्ट में लिखी स्थानीय निरीक्षण करने की बात

भास्कर संवाददाता | नागदा

ग्राम पंचायत मड़ावदा में शौचालय निर्माण में हुए गड़बड़झाले की जांच में एक बार फिर पेंच फंस चुका है। जनपद पंचायत सीईओ एम.एल. स्वर्णकार ने अपनी ओर से दिए प्रतिवेदन में स्थानीय निरीक्षण करने की बात लिख दी है। इससे एसडीएम अशोक व्यास को मंगलवार को साैंपी जाने वाली जांच रिपोर्ट फिर आगे बढ़ गई है। बुधवार को अतिरिक्त तहसीलदार संजय वाघमारे मड़ावदा पहुंचेंगे और दोबारा निरीक्षण करने के बाद अपनी रिपोर्ट एसडीएम को सौंपेंगे। इसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी, हालांकि वाघमारे ने निरीक्षण के बाद जांच प्रतिवेदन बुधवार को ही सौंपने की बात कही है।

आखिर दोबारा निरीक्षण की क्या जरूरत- शिकायतकर्ता रमेश, राजेश व दिलीप ने बताया कि 16 नवंबर को शिकायत के बाद 10 दिसंबर 2015 को अतिरिक्त तहसीलदार वाघमारे ने गांव पहुंचकर निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान भी शौचालय के लिए मात्र गड्‌ढे खुदे हुए मिले थे। ऐसे में अब दोबारा निरीक्षण की क्या जरूरत है। शिकायतकर्ताओं ने बताया जांच में हुई देरी के कारण विधवा महिला के यहां दोषियों ने शौचालय का निर्माण भी कर दिया है। हालांकि विधवा महिला द्वारा दिए गए बयान की रिकॉर्डिंग व मय फोटो शिकायतकर्ताओं के पास है। उनका कहना है कि अगर प्रशासन सही जांच नहीं करता है तो उक्त प्रमाण को कोर्ट में वाद के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।

जांच रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। जनपद पंचायत सीईओ ने स्थानीय निरीक्षण की बात लिखी है। वहीं पूर्व में हुए निरीक्षण के दौरान शिकायतकर्ताओं ने पंचनामे पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। इस वजह से दोबारा निरीक्षण किया जा रहा है। बुधवार को निरीक्षण के बाद जांच प्रतिवेदन सौंपा जाएगा। संजय वाघमारे, अतिरिक्त तहसीलदार खाचरौद

दोषियों को बचाने में लगा जनपद पंचायत
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक एसडीएम व्यास ने जनपद पंचायत सीईओ स्वर्णकार व अतिरिक्त तहसीलदार वाघमारे को संयुक्त जांच करने के आदेश दिए थे, तो क्या जनपद पंचायत सीईओ ने कार्यालय में ही बैठकर जांच रिपोर्ट बना दी है। तभी उन्होंने स्थानीय निरीक्षण की बात अपने प्रतिवेदन में कही है। इससे साफ हो रहा है कि जनपद पंचायत सीईओ कहीं न कहीं दोषियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक सीईओ स्वर्णकार ने उन्हें फोन कर यह तक कहा था कि देख लो कहीं गलती में हुए तो मानहानि का केस लग सकता है। जब दोषियों को बचाने के लिए अधिकारी ही शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाएंगे तो आवेदक किसे अपनी व्यथा सुनाएंगे।

मामला ग्राम पंचायत मड़ावदा में शौचालय निर्माण में गड़बड़झाले का
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