मजदूरी कर पढ़ाई पूरी की, अब गरीब बच्चों पर ध्यान
अक्सर लोग कहते हैं हम आकाश छू लेते मगर मौका नहीं मिलता… जो ऐसा कहते हैं उनके इरादों में जरूर कोई कमी रही होगी… यह कहना है खाचरौद की सुनीता का…मजदूर परिवार में जन्मी 21 वर्षीय इस युवती ने आर्थिक विषमताओं के बावजूद अपने इरादों को कभी डगमगाने नहीं दिया। सुबह से लेकर शाम तक खेतों में मजदूरी कर परिवार का सहारा तो बनी ही, अपनी मेहनत की कमाई से स्नातक की पढ़ाई भी पूरी कर चुकी है।
7वीं कक्षा से ही सुनीता कर रही है संघर्ष
खाचरौद के कस्बा क्षेत्र में एक छोटे से घर में सुनीता अपने पिता सत्यनारायण धाकड़, मां व भाई के साथ रहती है। पिता सत्यनारायण एक सोने-चांदी के व्यापारी के यहां मजदूरी करते हैं, जिससे घर चलता है। आर्थिक हालात खराब होने से पिता सुनीता व भाई पवन को पढ़ाने में असक्षम थे। लेकिन सुनीता ने पढ़ाई करने की ठान रखी थी। मजबूत इरादे के साथ कक्षा 7वीं से ही दिन में मजदूरी और रात में पढ़ाई करना शुरू की। दिनभर खेतों में या जहां मजदूरी मिली, वहां दिनभर पसीना बहाया। रात में घर का कामकाज निपटा कर पढ़ाई की। सुनीता की जिद कामयाब भी हुई, कक्षा 8वीं से अब तक परीक्षा परिणाम सर्वश्रेष्ठ रहा। स्नातक का आखिरी सेमेस्टर बचा है, जिसे वह जल्द होने वाली परीक्षा देकर उत्तीर्ण करने की बात कहती है। जहां एक ओर तमाम सुविधाओं के बावजूद रूढ़ीवादी परंपरा के कारण लड़कियों को 12वीं के बाद पढ़ने नहीं दिया जाता है, वहीं सुनीता का हौंसला और पढ़ाई के प्रति ऐसे लोगों के लिए सबक है।
खेत में मजदूरी करती सुनीता (गोल घेरे में)।
सुनीता शिक्षक बनकर पढ़ाना चाहती है
सुनीता स्नातक के बाद बीएड व डीएड करना चाहती है। इसके लिए वह दिनभर खेतों में कड़ी मेहनत कर रही है। मजदूरी का कुछ रुपया घर में तो कुछ रुपया अपनी पढ़ाई के लिए एकत्रित कर रही है। सुनीता का सपना शिक्षक बनने का है। बकौल सुनीता शिक्षक बनकर मैं उन तमाम बच्चों को शिक्षा देना चाहती हूं, जो आर्थिक तंगी के चलते अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते हैं।
वैलेंटाइन डे पर दिव्यांग बहन को उद्यमी भाइयों का उपहार
इरादों की मजबूत चापानेर की दिव्यांग पवित्रा वाक्तरिया को भास्कर की पहल पर वेलेंटाइन डे पर लघु उद्योग भारती के उद्यमी भाइयाें ने ट्रायसिकल बाइक उपहार में दी है। पवित्रा दोनों पैर से चल नहीं सकती है। बावजूद गांव से 22 किमी दूर खाचरौद कॉलेज पहुंचकर उसने स्नातक की पढ़ाई पूरी की। ऑपरेशन के बाद थोड़ा बहुत चलना था, वह भी बंद हो गया। इससे पवित्रा को स्नातकोत्तर की पढ़ाई में परेशानी आ रही थी। भास्कर की खबर के बाद उद्यमी भाइयों ने वेलेंटाइन डे पर दिव्यांग बहन को उपहार देकर उसकी आने-जाने की परेशानी को कम करने का प्रयास किया। ट्रायसिकल बाइक लघु उद्योग भारती के मोतीसिंह शेखावत, दीपक केरवार, नितिन जैन, एसपी सिंह, गुरविंदर सिंह, धीरजकुमार, अजय गरवाल, जितेंद्र श्यान, कैलाश मरमट, संगम जैन, पंकज मारू, अमरजीत, राजेंद्र मालपानी, दिनेश परिहार आदि ने दी है। ट्रायसिकल बाइक सौंपते समय अमनदीपसिंह खालसा, दिलीप कांठेड़, राजेश गगरानी, हिम्मतसिंह राठौर, जमना मालपानी, नारायण मंडावलिया सहित भास्कर स्टाफ भी मौजूद था।