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वंदनीय है शिक्षक की प्रभुता : व्यास

7 वर्ष पहले
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सरस्वती शिशु मंदिर में शिक्षक सम्मेलन

भास्करसंवाददाता | खातेगांव

कृष्णका कर्मयोग, राम की मर्यादा, विवेकानंद का ज्ञान दर्शन, अर्जुन का कौशल शिक्षक के ज्ञान दर्शन का ही प्रतिफल है। शिक्षकीय प्रभुता वंदनीय है। शिक्षा वही सर्वोत्तम है जो संस्कार, नैतिकता, आदर्श जगाए। मेकाले कुटीलता के साथ अंग्रेजी और ऐसी शिक्षा नीति हमारे यहां छोड़ गए जो केवल बाबू बनाती है। हमारे सांस्कृतिक शिक्षकीय गौरव से दूर करती है। उनकी शिक्षा हमारे मस्ताने पन, स्वच्छंदता को बांधने वाली है। यह समझना होगा। यह बात साहित्यकार देवकृष्ण व्यास ने कही। वे हिंदी सप्ताह के तहत सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित शिक्षक सम्मेलन को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। संस्था समिति अध्यक्ष किशोर मातवणकर, हिम्मतसिंह जामलिया, सेवानिवृत्त शिक्षक जीपी लोधी विशेष अतिथि थे। स्वागत प्राचार्य कांतिलाल मंडलोई, मोहनसिंह राजपूत ने किया। परिचय अनिल चौरे ने दिया। मनोज तिवारी, योगेश शर्मा, नितिन चौबे ने संबोधित किया। संचालन ओपी शर्मा ने किया। जीवनलाल धनगर ने आभार माना।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए अतिथि