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हर कार्य के पीछे एक उद्देश्य होता है- वीररत्नविजय मसा

4 वर्ष पहले
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महिदपुर | किसी भी कार्य को करने का लक्ष्य जरुर रहता है। बिना इसके कोई प्रवृत्ति नहीं होती। मंदिर जाएं तो आत्मशांति प्राप्त करने, दुकान जाएं तो अर्थोपार्जन करने। दुनिया का कोई भी काम क्यों न हो उसके पीछे एक उद्देश्य जरुर होता है। यह बात प.पू. वीरर| विजयजी म.सा. ने लाल मंदिर परिसर में व्यक्त किए। आचार्यश्री ने आगे कहा कि जो जिनवाणी को जाने, उसे माने, साथ ही अपने जीवन में अंगीकार करें, जिनेश्वर जिसके देवता, राग-द्वेषादि पर विजय पाने का प्रय| करता रहे वह जैन है। तीन गति के जीव (नरक, तिर्यंच, देव) आत्मविकास नहीं कर सकते। सिर्फ मानव ही कर सकता है। चार गति में मानव काली मिट्टी, तिर्यंच लाल मिट्टी, नरक भूर-भूरी मिट्टी व देवता पथरीली भूमि मान सकते है। जिस प्रकार खेती में काली मिट्टी उपजाऊ व श्रेष्ठ होती है। वैसे ही चारों गति में मानव गति उत्तम है। आत्मा के बिना परमात्मा व परमात्मा के बिना आत्मा का कोई महत्व नहीं। सुख के दिनों में आपको स्वर्णकार याद आता है और दुख के दिनों में मुनि याद आते है। चातुर्मास के दौरान रोजाना तेले एवं आयंबिल की कड़ी में उत्साहपूर्वक पचक्खान लिए जा रहे है। साथ ही अठ्ठाई व नव दिवसीय महामंत्र नवकार के एकासने में बढ़चढ़कर नाम लिखाए जा रहे है।

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