प्रभु जन्म पर इंद्र ने मेरू पर्वत पर किया अभिषेक
महिदपुर रोड स्थित पार्श्वनाथ मंदिर में आयोजित प्रतिष्ठा महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को भगवान पर्श्वनाथ का जन्म हुआ। गीताश्री गार्डन में आयोजित नाट्य के मंचन से भगवान के जन्म का दृश्य प्रतिपादित किया। जन्मोत्सव के दौरान भज वाराणसी नगरी में बधाई गीत गूंजते ही श्रद्धालुओं ने भगवान की प्रतिमा के सक्षम चावल अर्पण कर खुशियां मनाई। वहीं नाट्य के दौरान 56 दीपकुमारी ने भगवान की माता का स्तवन के माध्यम से कुशल क्षेम जाना। इस बीच हरिगमिशी देव से भगवान इंद्र को प्रभु के जन्म की सूचना मिलते ही उन्होंने परिवार संग मेरू पर्वत पहुंचकर भगवान के जन्म का पहला अभिषेक किया। नाटक को देवेश जैन व दिलीपसिंह सिसौदिया ने संगीतमय किया। संचालन सुनील वागरेचा ने किया।
जन्म महोत्सव के बाद श्रद्धालुओं ने पार्श्व प्रभु को चांदी के पालने में झुलाया। जन्मोत्सव से पूर्व सुबह 7 बजे राष्ट्रसंत आचार्य लेखेंद्र सूरीश्वर मसा, मुनि मृगेंद्रविजय मसा, साध्वी अनंतगुणाश्रीजी मसा, अक्षयगुणाश्रीजी मसा, समकितगुणाश्रीजी मसा, भवितगुणाश्रीजी मसा की निश्रा में मंदिर परिसर में दैविका हवन, पूजन किया गया। 8 बजे श्वेतांबर मूर्तिपूजक श्रीसंघ की नवकारसी का आयोजन हुआ। जिसका लाभ अमोलकबाई कांठेड़ परिवार ने लिया। दोपहर 2 बजे मंदिर परिसर में 18 अभिषेक महापूजन हुआ। महापूजन का विधान विधिकारक भरतभाई टी जैन अहमदाबाद ने कराया। इसका का लाभ मीठालाल तेजराज गिरिया मेहता परिवार पूणे वालों ने लिया। शाम 4.30 बजे गीताश्री गार्डन में श्रीसंघ के स्वामी वात्सल्य का आयोजन किया गया। रात 11 बजे मंदिर परिसर में घंटाकर्ण महावीर के महापूजन, हवन हुआ।
पद्मावती महापूजन व भक्ति संध्या आज
मीडिया प्रभारी विपिन वागरेचा ने बताया महोत्सव के तीसरे दिन सोमवार सुबह 9 बजे मंदिर परिसर में पार्श्व पद्मावती महापूजन, दोपहर 12.39 बजे भगवान का नामकरण, पाठशाला गमन, मामेरा, लग्न महोत्सव, राज्याभिषेक, नवलोकांतिक देवों द्वारा दीक्षा की विनती के नाटक का मंचन हाेगा। वहीं शाम 7 बजे अंगरचना, भक्ति संध्या, रात 11 बजे मणीभ्रद वीर महापूजन व हवन हाेगा।
भक्ति संध्या में झूमे श्रद्धालु
जन्मोत्सव के बाद रात 8 बजे गीताश्री गार्डन में भक्ति संध्या का आयोजन किया गया। यहां माधुरी विश्वास उदयपुर ने भजनों की प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुअों को झूमने पर मजबूर कर दिया। जन्मोत्सव को लेकर मंदिर परिसर को 1008 दीपों से सजाया गया था।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक नृत्य की प्रस्तुति देती बालिकाएं।
प्रभु को सिर पर उठाए श्रद्धालु व आशीर्वाद लेती समाज की महिलाएं।