स्वप्न का फल जानकर खुशी से झूम उठा राज दरबार
महोत्सव के पहले दिन हुआ च्यवन कल्याणक के नाटक का मंचन
भास्कर संवाददाता | नागदा
मंत्रीश्वर सावधान..., नगरसेठ सावधान..., सेनापति सावधान... वाराणसी नगरी के महाराजा अश्वसेन दल-बल के साथ राज दरबार में पधार रहे हैं... यह गूंज थी द्वारपालों की। नजारा था महिदपुर मार्ग स्थित नाकोड़ा पार्श्वनाथ जैन मंदिर में चल रहे प्रतिष्ठा महोत्सव के पहले दिन शनिवार सुबह 10.30 बजे गीताश्री गार्डन में च्यवन कल्याणक का।
च्यवन कल्याणक महोत्सव में भगवान की माता ने गर्भावस्था में जो 14 स्वप्न का दर्शन किया था, उनका मंचन किया गया। स्वप्नपाठक से स्वप्न का फल जानकार राज दरबार खुशी से झूम उठा। वहीं इंद्र ने सपरिवार भगवान की गर्भावस्था में वंदना कर च्यवन कल्याणक महोत्सव मनाया। भगवान के माता-पिता बनने का लाभ अलकाबेन भावेशभाई जैन इंदौर ने लिया। नाटक में इंद्र-इंद्राणी का किरदार प्रतीक व निर्मल छोरिया, नगरसेठ सौरभ कोलन, कोषाध्यक्ष अभिषेक कोलन, सेनापति आयुष बोहरा, स्वपनपाठक जितेंद्र जैन, द्वारपाल आशीष वागरेचा व अमन छोरिया ने निभाया। देवेश जैन मोहनखेड़ा ने संगीत दिया।
शनिवार सुबह 9 बजे राष्ट्रसंत आचार्यश्री लेखेंद्र सूरीश्वरजी मसा, मुनिश्री मृगेंद्रविजयजी मसा, साध्वीश्री अनंतगुणाश्रीजी, अक्षतगुणाश्रीजी मसा, समकितगुणाश्रीजी, भवितगुणाश्रीजीमसा आदि साध्वीमंडल की निश्रा में मंदिर परिसर से जल कलश यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा के साथ पांच दिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव की शुरूआत हुई। बालिका व महिला मंडल ने कुएं से जल भर भगवान की प्रतिमा का पक्षाल किया। दोपहर 12.39 बजे लघुनंदा व्रत, बीस स्थानक, लघु नवपद, लघु सिद्धचक्र महापूजन का आयोजन किया गया। महापूजन का विधान अहमदाबाद से आए विधिकारक भरतभाई टी जैन ने करवाया। अंगरचना एवं भक्ति संध्या का लाभ दमयंति अशोक संघवी परिवार मुंबई ने लिया। रात 8 बजे मंदिर परिसर में महाआरती के साथ नाकोड़ा भैरव महापूजन व हवन का आयोजन किया गया।
आज ये आयोजन
महोत्सव के दूसरे दिन रविवार सुबह 10 बजे गीताश्री गार्डन में भगवान पार्श्वनाथ के जन्म कल्याणक महोत्सव के तहत 56 दीपकुमारी नृत्य, मेरू पर्वत पर भगवान का प्रथम अभिषेक का नाटक के माध्यम से मंचन किया जाएगा। मंदिर परिसर में दोपहर 12.39 बजे आचार्यश्री की निश्रा में अठारह अभिषेक महापूजन का विधान होगा। रात 8 बजे महाआरती के साथ भक्ति संध्या का आयोजन होगा।
जल यात्रा में शामिल समाज की महिलाएं व आचार्यश्री।
कार्यक्रम में मौजूद समाजजन। नाट्य का मंचन करती समाज की महिलाएं।