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दो हजार 64 मामलों को सुना

7 वर्ष पहले
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कोई हारा कोई जीता

लोकअदालत में हुए फैसलों में ‘न कोई हारा कोई जीता’ दोनों पक्षकारों ने फैसले को खुशी-खुशी स्वीकार किया और केस खत्म। यह नजारा था राष्ट्रीय मेगा लोग अदालत का। इसमें राजीनामा योग्य सिविल, आपराधिक, राजस्व, पुलिस, बिजली कंपनी, बैंक, बीमा, नगरपालिका सहित अन्य विभागों के प्रकरणों पर समझौते हुए।

जो मामले वर्षों से न्यायालय में नहीं सुलझ रहे थे वे चंद मिनटों में सुलझ गए। किसी का भरण-पोषण का मामला था तो किसी का आपराधिक। किसी पर बिजली चाेरी का प्रकरण था तो किसी पर राजस्व की बकाया का। किसी पर बैंक की पेनल्टी इतनी हो गई कि भरना मुश्किल था। सभी पक्ष राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत में न्यायाधीश के सामने समझौते के लिए पेश हुए तो प्रकरण चंद मिनटों में सुलझ गए। निर्णय से कोई हारा कोई जीता पर दोनों पक्षों को फायदा जरूर हुआ। समझौता योग्य प्रकरणों के निराकरण के लिए जिले में आयोजित राष्ट्रीय मेघा लोक अदालत का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा शनिवार को हुआ। जिले में नीमच, मनासा जावद में 28 खंडपीठ बनाई थी। इनमें 20 हजार से ज्यादा मामले रखे थे। मामलों की सुनवाई देर शाम तक चलती रही। इस दौरान 12 हजार प्रकरणों का निराकरण हो गया।

राष्ट्रीय मेघा लोक अदालत का शुभारंभ शनिवार सुबह 10.30 बजे न्यायालय में किया। मुख्य अतिथि सीआरपीएफ डीआईजी आरजीआर भट्ट, डीआईजी सतपाल रावत के मुख्य आतिथ्य अध्यक्षता जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश गुप्ता ने की। विशेष न्यायाधीश आरसी वार्ष्णेय अभिभाषक संघ अध्यक्ष सुनील जोशी मंचासीन थे। संचालन न्यायाधीश अभिषेक गौड़, जिला विधिक सहायता अधिकारी सुभाष चौधरी ने किया।

लोक अदालत पहुंचे ग्रामीण।

किसके कितने मामले

बिजलीविभाग 1150

मनरेगा-जपं 500

संपत्तिकर 195

आपराधिक 141

भरणपोषण 07

संपत्तिवाद 09

बैंक प्रकरण 56

कम समय में निपटारा

^जहांप्रकरणों के निपटारे में वर्षों लगते हैं, वहीं लोक अदालत में कम समय में तत्काल दोनों पक्ष के सामने प्रकरण का निराकरण हो जाता है। आरजीआरभट्ट, डीआईजीसीआरपीएफ

भेंट किया पौधा

मेगालोक अदालत के दौरान जिन प्रकरणों में समझौता हुआ तो पक्षकारों को पौधा भेंट किया। न्यायाधीश अभिषेक गौड़ ने न्यायालय में हुए निर्णय के बाद पक्षकार बालचंद खाती पटेल को पौधा भेंट किया।

हर पक्ष को न्याय

^न्यायके लिए इंतजार नहीं करन