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आज पुष्य नक्षत्र- तीन दिन रहेंगे खरीददारी के श्रेष्ठ मुहूर्त
श्राद्धपक्षको 6 दिन और है। इन दिनों तीन श्रेष्ठ मूहूर्त के साथ दो अमावस्या के योग हैं। श्राद्धपक्ष के साथ नवरात्रि में कई शुभ संयोग बनेंगे। इनमें खरीदी की जा सकती हैं। श्राद्धपक्ष में शुक्रवार को पुष्य नक्षत्र और बाकी दो दिन गजकेसरी योग रहेंगे। शारदीय नवरात्रि में तीन दिन सर्वार्थसिद्धि योग का महासंयोग बनेगा। पुष्य नक्षत्र जहां खरीददारी के लिए सर्वश्रेष्ठ रहेगा वहीं सर्वार्थसिद्धि योग खरीददारी के साथ नए कार्य की शुरुआत के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं। पंडित गोविंद उपाध्याय, नृसिंह मंदिर मनासा के अनुसार 25 सितंबर को हस्त नक्षत्र, ब्रह्म योग, कन्या राशि का चंद्रमा, कर्क राशि के गुरु में शारदीय देवी नवरात्रि का आरंभ होगा। इन शुभ मुहूर्त में खरीददारी की जा सकती हैं।
संयोग से शनि-गुरु दोनों उच्च राशि में
पुष्यनक्षत्रों का राजा है। इसमें किए सभी कार्य स्थिर होते हैं। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु हैं। पंडित मालचंद शर्मा, अध्यक्ष कर्मकाण्डी विप्र परिषद के अनुसार फलित ग्रंथों में शनि को नक्षत्र का स्वामी माना जाता है। गुरु शुभ का कारक है। शनि स्थिरता का। इस साल संयोग से शनि भी उच्च राशि तुला में है और गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में हैं।
सर्वार्थसिद्धियोग
नवरात्रिमें तीन दिन रहे सर्वार्थसिद्धि योग भी श्रेष्ठ हैं। यह सभी कार्य को सिद्ध करने वाला हैं।
पितृपक्ष
19सितंबर > पुष्यनक्षत्र दिनभर रहेगा।
20-21सितंबर >गजकेसरी योग दोनों दिन रहेगा। सभी तरह की खरीददारी के लिए श्रेष्ठ।
नवरात्रि
25सितंबर > हस्तनक्षत्र, ब्रह्म योग।
27सितंबर >सर्वार्थसिद्धि योग।
29सितंबर >सर्वार्थसिद्धि योग, ललिता पंचमी।
3अक्टूबर> सर्वार्थसिद्धि योग विजयादशमी(दशहरा)।
किस दिन, कौन-सा योग
पुष्य नक्षत्र
पितृपक्षमें 19 सितंबर को पुष्य नक्षत्र योग सूर्योदय से शुरू होकर अगले दिन सुबह 9.10 बजे तक रहेगा।
दोदिन अमावस्या
पितृपक्षमें इस बार अमावस्या दो दिन रहेगी। पंडितों के अनुसार 23 सितंबर सुबह 9.46 बजे तक चतुर्दशी हैं। इसके बाद अमावस्या शुरू होगी, जो 24 सितंबर तक रहेगी। पितृ तर्पण, श्राद्ध 23 को होगा। 24 सितंबर को स्नान-दान और देवकार्य के लिए अमावस्या रहेगी।