बाबू को तीन साल की सजा
पशु चिकित्सा विभाग में रिश्वत लेने वाले एक बाबू को अपर सत्र न्यायालय ने 3 वर्ष की सजा सुनाई। बाबू को 2012 में लोकायुक्त टीम ने 3000 रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा था। भ्रष्टाचार को लेकर सप्ताहभर के दौरान एडीजे कोर्ट का दूसरा फैसला है।
सिटीरिपोर्टर | नीमच
जिलाअभियोजन अधिकारी आरआर चौधरी ने मुताबिक पशु चिकित्सा विभाग में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 स्थापना शाखा प्रभारी प्रभाकर राव पिता बलवंत राव डोंगरे को 27 नवंबर 2012 को लोकायुक्त टीम ने 3000 रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा था। विसंगति पूर्ण पेंशन प्रकरण के सही निर्धारण के नाम पर उसने रिश्वत की मांग की थी। शिकायत लोकायुक्त टीम को गई। टीम ने केमिकल लगे 500 100 के पांच-पांच नोट लेकर शिकायतकर्ता को डोंगरे बाबू के पास भेजा। जैसे ही उन्होंने रुपए लिए टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
साक्ष्यों गवाहों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश विधि सक्सेना ने गुरुवार को बाबू को सजा सुनाई। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत धारा 7 13(1) तथा 13(2) के तहत तीन-तीन साल की सजा एवं 6 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एडीजे कोर्ट ने सप्ताह भर के दौरान दूसरा फैसला दिया है। इसमें रिश्वत लेने के आरोप में लोकायुक्त टीम द्वारा पकड़े सरकारी कर्मचारी को तीन साल सजा सुनाई है। इसके पहले 5 दिसंबर को मनासा के एएसआई लक्ष्मणसिंह मेढ़ा को 5 हजार रुपए की रिश्वत लेने के मामले में इसी न्यायालय ने 3 साल की सजा दी है।
विभाग में भृत्य के पद कार्यरत स्व. प्रभुलाल बंजारा का सेवाकाल के दौरान 2000 में निधन हो गया। उनके स्थान पर बेटे दिनेश को मनासा चिकित्सालय में भृत्य की अनुकंपा नौकरी मिल गई और प|ी शंभूबाई को हर माह 3000 रुपए की पेंशन मिल रही थी। छठे वेतनमान के तहत पेंशन रिवाइज करवाना था। स्थापना शाखा में कार्यरत बाबू डोंगरे ने प्रकरण स्वीकृत करने के 3000 रुपए मांगे थे। रिश्वत की मांग उसने दिनेश को फोन कर की थी और रुपए देते समय लोकायुक्त टीम ने 27 नवंबर 2012 को कार्यालय में पकड़ लिया था।
एक सप्ताह में दूसरा फैसला
ये था मामला
भ्रष्टाचार मामले में सप्ताहभर में एडीजे कोर्ट का दूसरा फैसला