बड़े तस्करों के नाम उगलवाने में जुटी पुलिस
किसी दूसरे व्यक्ति को मारकर उसे कुख्यात तस्कर घनश्याम धाकड़ की हत्या का रूप देने के मामले में पकड़ाए गुडि्डया उर्फ भीमा उर्फ भीमसिंह बंजारा से पुलिस क्षेत्र के बड़े तस्करों के नाम उगलवाने की कोशिश में लगी है। एसपी का कहना है हमारे हाथ महत्वपूर्ण कड़ी लगी है। इससे क्षेत्र में अफीम और डोडाचूरा की तस्करी करने वाले बड़े तस्करों के नाम सामने आ सकते हैं।
एसपी मनोज सिंह ने बताया गुडि्डया बंजारा 15 फरवरी तक के लिए रिमांड पर मिला है। हम उससे यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि नीमच और मंदसौर जिले के बड़े तस्कर और प्रमुख एजेंट कौन हैं। तस्करों और एजेंटों का नीमच व मंदसौर जिले के अलावा राजस्थान व पंजाब में कहां-कहां तक कनेक्शन है। चूंकी राजस्थान व पंजाब में अफीम की काफी खपत है, अत: नीमच-मंदसौर से तस्करी होकर अफीम इन दोनों राज्यों में पहुंचती है। पूछताछ में इसी को बेस मानते हुए यह पता लगाया जाएगा कि वहां कौन-कौन अफीम खरीदता है। गुड्डिया से इन सभी के सवालों के जवाब रिमांड अवधि के दौरान पता करने हैं।
बंशी के साथ मिलकर तस्करी करता था गुडि्डया
गुडि्डया बंजारा की दोस्ती तस्कर बंशी गुर्जर से काफी पुरानी है। दोनों बंशी गुर्जर के कथित एनकाउंटर से पहले भी थी और उसके बाद भी कायम रही। दोनों मिलकर ही तस्करी करते थे। यही नहीं गुड्डिया को अपनी जगह दूसरे की लाश रखकर खुद को मरा बताने की साजिश रचने का आइडिया भी बंशी ने ही दिया था। एसपी ने बताया बंशी गुर्जर को तस्करी के मामले में पूर्व में गिरफ्तार किया गया था। उसे जोधपुर पुलिस पेशी के लिए न्यायालय ले जा रही थी तब वह फरार हो गया था। पुलिस ने तब उसके नलवा स्थित घर से 1 जेसीबी, 5 ट्रैक्टर, 1 थ्रेशर व 1 बाइक बरामद की थी।
10 मार्च 2011 को हाई-वे पर हुए एक्सीडेंट में तस्कर घनश्याम धाकड़ को मृत घोषित किया गया था। घटना स्थर पर रखे अन्य व्यक्ति के शव की शिनाख्त घनश्याम धाकड़ के रूप में कैंट के तत्कालीन थाना प्रभारी रवींद्र बोयट सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने की थी। जबकित बाद में तस्कर घनश्याम धाकड़ जिंदा पकड़ा गया। इसे पुलिस विभाग ने गंभीरता से लिया और गलत शिनाख्त करने के लिए पुलिस विभाग ने कैंट के तत्कालीन थाना प्रभारी बोयट, जांच अधिकारी एमआर गर्ग, आरक्षक मुकेश चौहान, कमलसिंह, अजीज खान, उमेश चौहान को निलंबित कर दिया गया था।
गलत शिनाख्ति पर निलंबित हुए थे टीआई व पुलिसकर्मी
एसपी सिंह ने बताया तस्कर कंजार्डा से लगे गांवों से होकर अफीम और डोडाचूरा लेकर राजस्थान जाते हैं। तस्कर दारू व दुदरसी होकर राजस्थान के सेमार्डा निकल जाते हैं तस्कर। इससे वे पकड़े नहीं जाते हैं।
कंजार्डा के रास्ते राजस्थान तक तस्करी
बंशी गुर्जर के एनकाउंटर का दावा
8 फरवरी 2009 : 0000- बेसलाघाट (रामपुरा) पर बंशी गुर्जर के एनकाउंटर का दावा तत्कालीन एसपी वेदप्रकाश शर्मा (वर्तमान में आईजी कार्मिक भोपाल) ने किया था बताया था तत्कालीन मनासा एसडीओपी अनिल पाटीदार के नेतृत्व में पुलिस ने बंशी का एनकाउंटर किया। एनकाउंटर करने वाली टीम में तत्कालीन रामपुरा टीआई ग्लेडविन कार, मनासा के प्रभारी टीआई एसआई विवेक गुप्ता, कुकड़ेश्वर टीआई पीआर परमार, एसआई मुख्तियार कुरैशी, प्रधान आरक्षक श्यामलाल, बेणीलाल, नीरज प्रधान, फतेहसिंह, भगवानसिंह, आरक्षक अनोखीलाल, कमलेंद्रसिंह, दुर्गाशंकर तिवारी, मंगलसिंह शामिल थे।
घनश्याम धाकड़ की मौत की खबर मिली
10 मार्च 2011 : नीमच हाई-वे पर एक एक्सीडेंट की जानकारी कैंट पुलिस को मिली। मृत व्यक्ति की शिनाख्त कुख्तात तस्कर घनश्याम धाकड़ के रूप में हुई। मौके से बाइक व मृतक की जेब से घनश्याम धाकड़ का आईडी मिला। परिजन ने भी घनश्याम की लाश होने की पुष्टि की।
घनश्याम धाकड़ िजंदा मिला, पुलिस ने पकड़ा
15 सितंबर 2012 : डेढ़ साल बाद उज्जैन-नीमच साइबर सेल ने तस्कर घनश्याम धाकड़ को जिंदा गिरफ्तार किया। घनश्याम ने अपनी जगह अन्य को मारकर सड़क हादसा बताने के लिए तस्कर बंशी को 15 लाख रुपए दिए थे। एेसा उसने इसलिए किया क्योंकि वह तस्करी सहित अन्य 12 प्रकरण होने से पुलिस से परेशान था। वह हादसे में मौत दर्शाकर इनसे पिंड छुड़ाना चाहता था। उसकी जगह किसी और को मारने की योजना बंशी गुर्जर, उमाशंकर धाकड़, पप्पू गुर्जर, गुडि्डया बंजारा ने मिलकर बनाई थी और उसे अंजाम दिया था। धाकड़ की जगह एक भिखारी को मारा गया लेकिन उसका नाम क्या था, पता नहीं चल सका है। घनश्याम ने ही बताया था 8 फरवरी 2009 को हुए बंशी गुर्जर के कथित एनकाउंटर में किसी दूसरे को मारकर उसका शव रख दिया था।
आईजी स्क्वॉड ने उज्जैन से बंशी गुर्जर को पकड़ा
20 दिसंबर 2012 : दो माह बाद उज्जैन के तत्कालीन आईजी उपेंद्र जैन की स्क्वॉड ने उज्जैन से बंशी गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया था। इससे घनश्याम की बात सही साबित हो गई थी।
ऐसे चला था घटनाक्रम
टोटल रिकॉल