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सरकार मुआवजा बांट कर परेशान, प्रकृति बचाना होगी

5 वर्ष पहले
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वन समितियों के जागरूकता सम्मेलन में विधायक कैलाश चावला बोले

भास्कर संवाददाता | मनासा

प्रकृति के खिलाफ हुए कार्यों से किसानों पर संकट आ रहा है। सरकार मुआवजा बांट रही है। वह मुआवजा बांट-बांट कर परेशान है। इसलिए अब हमें प्रकृति की रक्षा करना होगी और जंगलों को बचाना होगा।

यह बात विधायक कैलाश चावला ने शुक्रवार को वन विभाग के ग्राम वन समिति जागरूकता सम्मेलन में कही। उन्होंने कहा पहले घने जंगल हुआ करते थे। उनका लोगों ने खूब दोहन किया। इसी का परिणाम हम भुगत रहे हैं। इसलिए अब हम सभी को मिलकर जंगल बचाने का काम करना होगा। अगर कोई व्यक्ति जंगल में पेड़-पौधे काट रहा है तो हमें उसे रोकना होगा। वन विभाग ने गांवों में वन रक्षा समितियां बनाई हैं। स्थानीय समितियां वन विकास की योजना बनाएं और उस पर काम करें। कृषि उपज मंडी अध्यक्ष बंशीलाल गुर्जर ने कहा नीलगाय किसानों को लिए गंभीर समस्या बन गई है। नीलगायें फसलों को नुकसान पहुंचा रही है। अगर किसी किसान का पशु वन संपदा को नुकसान पहुंचाता है तो विभाग उस पर कार्रवाई करता है। ऐसे में नीलगाय फसल को नुकसान करती है तब भी किसान को मुआवजा मिलना चाहिए लेकिन अक्सर ऐसा नहीं होता। मंदसौर के डीएफओ मनोज अर्गल ने कहा वन समिति और स्थानीय जनता की भागीदारी से ही वन का विकास संभव है। वन विभाग उज्जैन संभाग प्रभारी पीसी दुबे ने बताया प्रदेश में करीब 15 हजार ग्राम वन रक्षा समितियां काम कर रही हैं। इससे वनों की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। नीमच के डीएफओ एमएस सिसौदिया ने विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। सम्मेलन में उत्कृष्ट काम करने वाली ग्राम वन समितियों काे सम्मानित किया गया। एसडीओ बीपी शर्मा, रेंजर गोपाल बंधु, डॉ. राजेश पाटीदार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष बद्रीलाल पटेल आदि मौजूद थे।

ग्राम वन समितियों के सदस्यों को पुरस्कृत किया गया।

पशु चराने के लिए नहीं छोड़ें
विधायक चावला ने कहा सरकार लाखों रुपए खर्च कर जंगल में वृक्षारोपण करती है लेकिन किसान पशुओं को चरने जंगल में छोड़ देते हैं जो छोटे-छोटे पौधे नष्ट कर देते हैं। अगर वन विभाग कार्रवाई करता है तो किसान प्रश्न चिह्न लगा देते हैं। किसान विभाग पर सवाल उठाने के बजाय वन संरक्षण अधिनियम का पालन और वन विकास में सहयोग करें। वन समितियां किसानों को प्रेरित करें कि वे जंगल में पशुओं को चरने नहीं छोड़ें।

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