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आज जिले के 1 लाख 79 हजार बच्चों को देंगे पेट के कीड़े मारने की दवाई

5 वर्ष पहले
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राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस 10 फरवरी को मनाया जाएगा। जिले के 1 लाख 79 हजार से ज्यादा बच्चों को एल्बेडाजोल गोली का सेवन कराया जाएगा। इसके तहत 0 से 19 वर्ष तक के बच्चों को स्कूल व आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से एल्बेडाजोल की गोली का सेवन करवाया जाएगा।

मंगलवार को दोपहर 12 बजे रेडक्रॉस भवन में जिला स्तरीय मीडिया एडवोकेसी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में एमआई जिला समन्वयक निधि दुबे ने बताया बुधवार जिले के समस्त विद्यालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। जिले में 1356 विद्यालयों के 1 लाख 35 हजार 128 एवं जिले की 1062 आंगनवाड़ी के 44 हजार 557 बच्चों को पेट के कीड़े मारने की गोली दी जाएगी।

इसी दिन जिले के तीनों ब्लाॅक नीमच, जावद मनासा के स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों पर 0 से 19 वर्ष तक के बच्चों को एल्बेडाजोलकी दवा दी जाएगी। सरकार द्वारा चलाई जा रही सभी योजनाओं की जानकारी व परामर्श दिया जाएगा। डीपीएम अर्चना राठौर ने बताया कि विभाग द्वारा सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों व स्कूलों में एल्बेडाजोल की गोली की सप्लाई पहुंचा दी गई। जिले के अधिक से अधिक माताओं व 0 से 5 वर्षतक के बच्चों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यशाला में जिला आईईसी सलाहकार चंद्रपालसिंह राठौर ने भी विचार व्यक्त किए। विभाग लोगों से बच्चों को दवाई दिलवाने की अपील की है।

ये हैं लक्ष्ण

तीव्र संक्रमण होने पर दस्त, पेट दर्द, कमजोरी, भूख की कमी।

हल्के संक्रमण पर आम तौर पर बच्चों मंे कोई लक्षण नहीं दिखाई देते।

एेसे करें बचाव
नाखून साफ और छोटे रखे।हमेशा साफ पानी पियें। खाने को ढक कर रखे। साफ पानी से फल व सब्जियां धोए।

अपने हाथ साबुन से धोए, विशेषकर खाने से पहले और शौच जाने के बाद। जूते चप्पल पहने और खुले में शाैच न करें।

ये होता है प्रभाव
कृमि संक्रमण से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

भविष्य में उनकी कार्यक्षमता और औसत आयु में कमी आती है।

तीव्र संक्रमण के कारण बच्चे बीमार या थके रहते है। पढ़ाई में अक्सर बच्चे रुचि नहीं लेते।

संक्रमित बच्चों के शौच में कृमि के अंडे होते हैं। खुले में शौच करने से ये अंडे मिट्‌टी में मिल जाते है और विकसित होते है।

अन्य बच्चों के नंगे पैर चलने से, गंदे हाथों से खाना खाने से या फिर बिना ढका हुआ भोजन खाने से, लार्वा के संपर्क में आने से संक्रमित हो जाते है।

संक्रमित बच्चों में कृमि के अंडे व लार्वा रहते है और बच्चों के स्वास्थ्य पर हानि पहुंचाते है।

इस तरह फैलता है संक्रमण
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