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जिले के तीन हजार बच्चे कुपोषित

6 वर्ष पहले
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महिलाएवं बाल विकास विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के तमाम प्रयासों के बाद भी जिले में कुपोषण पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। जिले में अभी भी तीन हजार बच्चे कुपोषित हैं। इनमें से 657 गंभीर कुपोषित की श्रेणी में हैं। इनमें से 18 का उपचार जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में चल रहा है। बच्चों के परिजन यहां के इलाज से संतुष्ट नहीं हैं।

मनासा के पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती कुपोषित बच्चे के इलाज में लापरवाही से तबीयत बिगड़ने के बाद जिला अस्पताल रैफर किया गया था। यहां भी इलाज से संतुष्ट नहीं होने पर बच्चे को नर्सिंगहाेम ले जाना पाड़ा। इसने महिला एवं बाल विकास विभाग स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। गर्भवतियों को टीकारण, आंगनवाड़ी केंद्रों से पोषण सामग्री देने के बाद भी कुपोषण स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इसकी पुष्टि महिला एवं बाल विकास के आंकड़े कर रहे हैं। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 2014-15 में जिले में 5 वर्ष तक के 67,354 बच्चे थे। इनमें से 49,792 बच्चे सामान्य वजन, 14,591 कम वजन, 2,314 अति कम वजन 657 बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी वाले हैं। विभाग के सर्वे में 2971 बच्चे कुपोषण पीड़ित पाए गए हैं। इनके उपचार के लिए जिला अस्पताल सहित मनासा, रामपुरा रतनगढ़ में पोषण पुनर्वास केंद्र हैं। नीमच का केंद्र 20 बेड का है। बाकी केंद्र 10-10 बिस्तर के हैं। इन पर 31 दिसंबर 2014 तक 791 बच्चों को भर्ती कर इलाज दिया गया।

येहैं कारण

{आंगनवाड़ीकार्यकर्ता आशा कार्यकर्ता में समन्वय का अभाव।

{ आदिवासी क्षेत्र के नजदीक एक भी पोषण पुनर्वास केंद्र नहीं होना।

{अधिकतर परिजन कुपोषण को बीमारी नहीं मानते। वे बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र नहीं लाते।

कुपोषणके मुख्य कारण {कम उम्र की मां के बच्चे बच्चों के बीच कम अंतर होना। { खान-पान पर ध्यान नहीं दिया जाना। { खाने से मिलने वाले पोषक तत्वों की जानकारी नहीं होना।

ऐसेपहचाने कुपोषित बच्चे- {ऊपरी बांयी भुजा के मध्य भाग की गोलाई का नाप 11.5 सेमी से कम हो। { ऊंचाई/लंबाई के आधार पर वजन 3Z स्कोर से कम हो। { दोनों पैरों में गड्ढे पड़ने वाली सूजन हो।

जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती बच्चों के साथ उनकी मांएं।

^आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों गर्भवतियों को पोषण आहार देते हैं। बच्चों को पुनर्वास केंद्र भिजवाते हैं। रेलमबघेल, जिला परियोजना अधिकारी

^महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ समन्वय कर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र लाकर उनका इलाज करवाएंगे। एसपीश्रीवास्तव, डीपीएम