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3.41 करोड़ की लागत से पक्की हो रही नहरों में दरार आई

6 वर्ष पहले
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चंबलेश्वरबांध की नहरों को पक्का किया जा रहा है। इनमें अभी से दरार आने लगी है और साइडें भी टूटने लगी हैं। इससे निर्माम सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। किसानों को आशंका है कि इस ओर ध्यान नहीं दिया तो नहरों का पानी खेतों तक नहीं पहुंच पाएगा।

कंजार्डा क्षेत्र में स्थित चंबलेश्वर बांध बनने के बाद से अब तक कच्ची नहरों से खेतों में सिंचाई हो रही थी। इससे काफी पानी रास्ते में ही रिस जाता था और खेतों तक नहीं पहुंच पाता था। किसानों की मांग पर सिंचाई विभाग ने नहरों को पक्का करने के लिए 3.41 करोड़ रुपए की योजना बनाई। इसका ठेका कटारा कंपनी के कमलेश कटारा नेता कंट्रक्शन के ओमप्रकाश माली को मिला। एजेंसियों ने छह महीने पहले सीमेंट-कांक्रीट कर नहरें पक्का करना शुरू किया। अभी इनमें पानी छोड़ा जाना बाकी है। इससे पहले ही इनमें दरारें गई हैं।

सामग्रीकी गुणवत्ता पर उठे सवाल- नहरोंमें दरारें आने से निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीण गोपाल धाकड़, रामचंद्र धाकड़ प्रेमचंद धाकड़ के अनुसार नहरों के घटिया सामग्री उपयोग की जा रही है। इस कारण एक तरफ नहर पक्की हो रही है और दूसरी ओर इसमें दरारें रही हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि अगर नहरों में पानी छोड़ा गया तो नहरें टूट सकती है।

निर्माणाधीन नहरों में जगह-जगह दरारे रही है।

फैक्ट फाइल

लागत: 3.41करोड़

डेडलाइन: नवंबर2015

लंबाई: 9किमी मुख्य 7 किमी छोटी नहरें

सिंचाईहोगी : डेढ़हजार हेक्टे. से अधिक

लाभांवितगांव : कंजार्डा,चौकड़ी, खेड़ली, गफार्डा, गुजरी, चंबलेश्वर, खेड़ी, दूधवा, अमरपुरा, बरखेड़ा, मौजा, झोपड़िया अन्य छोटे गांव।

बांधकी क्षमता : 10.00मिलियम क्यूबिक मीटर

डेडस्टोरेज : 2.46मिलियन क्यूबिक मीटर

ठेकेदार को दी सख्त हिदायत

नहरोंमें दरारें आने से सिंचाई विभाग की नींद उड़ गई है। विभाग ठेकेदार से दरारें ठीक करवा रहा है। बताया जाता है कि विभाग ने ठेकेदार को इसके लिए सख्त हिदायत दी है।

ठीककरने के निर्देश दिए

^चंबलेश्वरबांध की नहरों का काम साल के आखिर तक निर्माण पूरा होगा। नहरों में कहीं-कहीं दरारें आई हैं। इतने बड़े काम में ऐसा हो जाता है। ठेकेदार को इन्हें ठीक करने के निर्देश दिए हैं। संजयकोहद, एसडीओ- सिंचाई विभाग, रामपुरा