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‘रुपए-पैसे से नहीं भगवान समर्पण से मिलते हैं’

6 वर्ष पहले
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प्रयासकरने रुपया-पैसा खर्च करने पर सांसारिक वस्तुएं मिल सकती हैं। पद, प्रतिष्ठा, भवन भी मिल सकता है पर भगवान नहीं। भगवान प्रेमपूर्वक समर्पण करने से मिलता है। यह बात निरंकारी संत महात्मा गोपाल महाराज ने कही। वे निरंकारी सत्संग में बोल रहे थे। उन्होंने कहा दुनिया के मालिक को कुछ नहीं चाहिए। वह प्रेम, समर्पण भावना का भूखा है। भजन-कीर्तन प्रसादी वितरण भी हुआ।