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सफाई को बनाएं रोज की आदत

7 वर्ष पहले
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शहरमें विशेष सफाई स्वच्छ भारत अभियान में भागीदारी के लिए नगरपालिका ने तैयारी शुरू दी है। अभियान 2 अक्टूबर से शुरू होगा। संसाधनों की कमी से जूझ रहा शहर का सफाई तंत्र ऐसे अभियानों में जुटकर कुछ अच्छा करने का प्रयास तो करता है लेकिन जनभागीदारी पर्याप्त नहीं होने से अभियान औपचारिकता बन जाते हैं। सफाई के लिए महज अभियान ही कारगर नहीं हैं। सफाई को शहरवासी रोज की आदत बनाएं।

शहर के 40 वार्डों में गांधी जयंती से शुरू होने वाले स्वच्छ भारत अभियान को लेकर नपा ने समाजसेवी संगठनों के साथ योजना बनाई है। इस पर अमल नपा के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी। अब तक ऐसे कई अभियान चले। इसमें आम आदमी की भागीदारी बहुत कम रही। जैसे ही अभियान खत्म हाेता है, स्थिति पहले जैसी हो जाती है। कचरा ऐसी समस्या है जो हर घर, वार्ड और शहर में है। कचरा प्रबंध की शुरुआत हर घर से हो तो ही इसके परिणाम बेहतर सकते हैं। सिर्फ जिम्मेदारों के भराेसे और दो-चार दिन के अभियानों से शहर की सूरत नहीं बदलेगी। हमें इसे आदत बनाना होगा।

उद्देश्य जागरूकता

^ऐसेअभियानों का उद्देश्य जन-जागरूकता है। सफाई ऐसा काम है, जो पूरे साल चलता है। कचरे का बेहतर प्रबंधन हो तो निसंदेह ऐसे अभियानों की सार्थकता सिद्ध होगी। हिमांशुभट्ट, सीएमओ

सुझाव लिए जाएंगे

^स्वच्छ भारत अभियान शहर के सभी वार्डो में चलाया जाएगा। इसमें आम आदमी की ज्यादा से ज्यादा भागीदारी हो सके। यह प्रयास होगा। नपा अपनी जिम्मेदारी का किस तरह बेहतर निर्वहन कर सकती है, यह सुझाव लिए जाएंगे। कुसुमगुप्ता, नपाअध्यक्ष

यह होना चाहिए

{प्लास्टिक के उपयोग, खुले में कचरा फेंकने पर सख्ती से रोक लगे। दंड का प्रावधान किया जाए।

{ कचरा प्रबंधन की नीति बने, जिम्मेदारी तय हो।

{ वार्डस्तर पर समिति बनाई जाए। मॉनीटरिंग की जाए। लोगों को अभियान से जोड़ा जाए।

यह कर रहे नपा के जिम्मेदार

{प्लास्टिक पर रोक, कचरा खुले में फेंकने को लेकर अभियान।

{ बैठक व्याख्यान के माध्यम से जोड़ा जाता है समाजसेवी संस्थाओं को।

{ वार्डस्तर पर समय-समय पर होते हैं जनजागरण के कार्यक्रम

यह है स्थिति

{एकअनुमान के मुताबिक शहर में रोज 36 टन कचरा सड़कों पर फेंका जाता है। इसमें से 26 टन कचरा ही नपा उठा पाती है। शेष 9 टन कचरा शहर की सड़कों पर बिखरा रहता है।

{ एक जेसीबी, दो डंपर अौर 150 हाथ ठेलों के भर