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अंग्रेजी के कारण समाज तक नहीं पहुंच पाया विज्ञान

7 वर्ष पहले
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मंदसौर|अंग्रेजी केकारण विज्ञान समाज तक नहीं पहुंच पाया। विज्ञान दुधारी तलवार है। इसका उपयोग मानवहित में होना चाहिए। किसानों को रासायनिक खाद की जानकारी देने के कारण देश का बड़ा कृषि क्षेत्र बंजर है। देश की नदियां नालों में बदल चुकी हैं। प्रदूषण रोकने के लिए समाज को हस्तक्षेप करना होगा।

यह बात पद्मश्री एवं माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय शोध संस्थान भोपाल के संयोजक विजयदत्त श्रीधर ने कही। वे विज्ञान संचार कार्यशाला में बोल रहे थे। सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा प्राचीन ऋषि वैज्ञानिक थे। प्रकृति संरक्षण के प्रति अामजन रुचि ले। नईदिल्ली के विज्ञान संचारक देवेंद्र मेवाड़ी ने कहा विज्ञान चेतना जरूरी है। संप्रेषण की भावना सरल होना जरूरी है। विधायक यशपालसिंह सिसौदिया ने कहा प्रदेश सरकार ने नए प्रयोगों को प्रोत्साहित किया। किसान दुष्प्रचार से प्रभावित हो जाता है, सही ज्ञान देना होगा। जल विज्ञानी भाेपाल के समाज चिंतक कृष्णगोपाल व्यास ने बताया कृषि से विमुख हो रहे किसानों का पलायन रोकना होगा। पत्रकार वसंत निरगुड़े ने कहा देश को परंपरा विज्ञान की आेर लौटना होगा। लोक विज्ञान जीवन का अटूट हिस्सा है। नपाध्यक्ष कुसुम गुप्ता, कल्पना ठन्ना भी उपस्थित थीं।

आयोजन में कृषि वैज्ञानिक नरेंद्रसिंह सिपानी, ब्रजेश जोशी, प्रदीप शर्मा, हरनामसिंह चंदवानी ने भी विचार रखे। स्वागत डॉ. देवेंद्र पौराणिक, बिंदू चंद्रे, महेश मिश्रा, डॉ. जेएल आेझा, पूरण सहगल, कैलाशचंद्र पांडेय, विक्रम विद्यार्थी, प्रेमलता मीणा, मुकेश सहारिया ने भी किया। संचालन समन्वयक डॉ. घनश्याम बटवाल ने किया।

कार्यशाला में मौजूद लोग। इनसेट : संबाेधित करते पद्मश्री श्रीधर।