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मंदसौर बिजली नुकसान रोकने में देश का दूसरा शहर बना
बिजलीका नुकसान रोकने में मंदसौर देश का दूसरा शहर बन गया है। पहले स्थान पर चंडीगढ़ है। ढाई साल से न्यूनतम लाइन लॉस की रिपोर्ट देने के बाद पावर फाइनेंस इंडिया भोपाल की टीम ने सर्वे किया। टीम ने विभाग द्वारा लॉस रोकने के लिए किए प्रयास को सराहा। इसका श्रेय कंपनी अधिकारी नए उपकरण तकनीक के साथ उपभोक्ताओं को देते हैं। न्यूनतम लाइन लॉस के ईनाम के तौर पर मंदसौर शहर को बिजली कटौती विहीन घोषित किया जा चुका है।
ढाई साल पहले बिजली वितरण कंपनी ने शहर में आरएपीडीपी (आरएक्सीलीरेटिट पांवर डेवलपमेंट एंड रिफोर्म प्रोग्राम) के तहत काम किया। इसके अंतर्गत विभाग ने 15 ट्रांसफार्मर लगाए। पुरानी केबल बदली। झुग्गी झोपड़ी इलाकों में एबी केबल डाली। इसके बाद शहर में बिजली का लॉस 20 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत तक गया। इस व्यवस्था को मेंटेन रखने के लिए उपभोक्ताओं ने साथ दिया। लगातार ढाई साल 5 प्रतिशत लाइन लॉस की रिपोर्ट पर पिछले सप्ताह भोपाल से आई पांवर फायनेंस ऑफ इंडिया की टीम ने शहर में सर्वे किया। कंपनी के बताए अनुसार ही लॉस मिला।
ऐसे समझे लाइन लॉस
हरशहर में कंपनी 132 केबी केंद्र से बिजली लेती है। एवज में प्रति यूनिट के मान से भुगतान करते हैं। भुगतान उपभोक्ताओं से बिल के माध्यम से लिया जाता है। उपभोक्ता तक बिजली पहुंचने में तारों में खत्म होने वाली बिजली के अतिरिक्त चोरी भी होती है। ढाई साल में 5 प्रतिशत ही नुकसान हो रहा है जो तारों में ही हो रहा है।
ऐसे कम हुआ लॉस
बिजलीवितरण कंपनी के एई विक्रांत ठाकुर ने बताया नगर में 15 नए छोटे ट्रासफार्मर लगाए इससे ट्रासफार्मर का लोड कम हुआ। पुरानी लाइन बदली इससे लॉस में कमी आई। इसके अलवा पिछड़ी झुग्गीबस्ती से लगे क्षेत्र इंद्रा कॉलोनी, नरसिंहपुरा, मदारपुरा, अयोध्या बस्ती में एबी केबल डाली। इससे रात को होने वाली बिजली चोरी रुकी। फिलहाल नगर को 46 लाख युनिट बिजली की जरूरत होती है। पहले इतनी बिजली में 20 से 22 प्रतिशत नुकसान होता था अब यह नुकसान 5 प्रतिशत रह गया है इसलिए यहां 24 घंटे बिजली सप्लाए हो रही है। विभाग ने पिछले माह 3 करोड़ 20 लाख रुपए के बिल दिए इनमें 3 करोड़ 10 लाख रुपए जमा हो गए।
शहर की जनता का भी मिला पूरा सहयोग
^बिजलीसमस्या को लेकर विभाग ने जो काम किए वह तो ठीक है इसके अलवा शहर के लोगों का भी सहयोग मिला। चोरी रोकने में सफलता मिली है। यही कारण है मंदसौर इस स्थिति में है। आरकेनायर, कार्यपालन यंत्री पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी मंदसौर