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6 माह से अटका है आवासों का आवंटन

7 वर्ष पहले
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शहरीगरीबों के लिए बनाए आवासों के लिए आए आवेदनों पर छह माह बाद निर्णय नहीं हो पाया। गड़बड़ी करने वाले आवेदकों को नोटिस जारी किए थे। अब आवेदकों ने ही नपा को नियमों के सवालों में खड़ा कर दिया। ऐसे में आवंटन प्रक्रिया उलझती जा रही है।

केंद्र सरकार की योजना में शहरी गरीबों के लिए नगरपालिका ने टिगरिया में 500 आवास बनवाए। इनके आवंटन की प्रक्रिया लंबे समय से उलझी है। अगस्त में भौतिक सत्यापन के बाद 819 आवेदकों की सूची को तैयार की थी। सूची को लेकर अभी तक निर्णय नहीं हो पाया। सितंबर में गड़बड़ी की आशंका में कुछ नाम सूची से हटाकर नोटिस जारी किए थे। साथ ही इनसे पात्रता प्रमाण मांगे थे। 10 सितंबर को इसकी अंतिम समय सीमा थी। इसी आधार पर अंतिम प्रतिवेदन तैयार किया गया है। यह एडीएम की अध्यक्षता में बनी समिति के समक्ष रखा जाएगा। इसमें अंतिम निर्णय होने की संभावना है।

रिश्तोंका हवाला देकर घेरा नपा को- नपाने गड़बड़ी की आशंका में 251 हितग्राहियों की सूची जारी की थी। इसमें से नपा के पास 155 आवेदकों के जवाब गए हैं। 96 आवेदक ऐसे हैं, जिनके जवाबों काे लेकर नोडल अधिकारी का निर्णय महत्वपूर्ण होगा।

15 आवेदक ऐसे हैं। जिनमें बेटे ने खुद को पिता के मकान में किरायेदार बताया था। 32 आवेदक जांच के बाद दिए गए पते पर नहीं मिले। नपा के पास जो जवाब आए, उसमें कुछ आवेदकों ने नपा को नियमों के सवालों में खड़े कर दिया। नपा ने आवंटन के लिए जो विज्ञप्ति जारी की थी, उसमें हितग्राही का बीपीएल श्रेणी और आवासहीन होना जरूरी था। आवेदक पिता के मकान में किरायेदार है तो वह अपात्र कैसे हो गया। रिश्तों के आधार पर उसे अपात्र कैसे माना जा सकता है। ऐसे जवाब आने के बाद अब नपा अफसर और प्रशासनिक अफसर असमंजस में हैं।

सूची नहीं बनने से अटका आवंटन

भवनआवंटित करने का मामला पात्रता सूची नहीं बनने से अटका है। 25 अगस्त को कलेक्टर ने बैठक ली थी। इसमें योजना की समीक्षा के बाद आवंटन में देरी पर नाराजी जताई थी। 3 सितंबर को लॉटरी की टाइम लिमिट तय थी। इसके बाद पिता के मकान में किरायेदारी का पेंच आने पर फिर नोडल समिति ने ऐसे आवेदन निरस्त करने के बजाए सुनवाई का नोटिस जारी किया। लॉटरी निरस्त हो गई। अब 10 सितंबर तक आए जवाब की रिपोर्ट तैयार की है।

^ जिन आवेदकों को नोटिस जारी हुए थे और सूची नपा कार्यालय पर चस्पा की थी, उनके जवाब गए हैं। ज