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कोर्ट में बहस हुई और हुए बयान

7 वर्ष पहले
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स्टाम्पकीमतों को लेकर जारी अध्यादेश का विरोध सोमवार को वकीलों ने काम से विरत रह कर किया। दोपहर में अभिभाषक संघ कार्यालय के सामने नारेबाजी भी की। सोमवार को नगर की 15 ज्यूडिशियल एवं उपभोक्ता फोरम, लेबर कोर्ट रेवेन्यू कोर्ट में तो बयान हुए और ही किसी मामले में बहस। इससे पक्षकारों को परेशानी आई। हड़ताल का कारण जानकर किसी ने भी विरोध नहीं किया।

स्टाम्प की कीमतों को लेकर 16 सितंबर से लागू अध्यादेश का विरोध शुरू हो गया है। सोमवार सुबह 10.30 बजे वकीलों ने हड़ताल की घोषणा की। हड़ताल पूरे दिन रही। दोपहर 1.30 बजे वकील अभिभाषक संघ कार्यालय के सामने एक हुए और आधे घंटे तक अध्यादेश के विरोध में नारेबाजी की। इससे पहले 19 सितंबर को अध्यादेश के विरोध में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के नाम ज्ञापन दे चुके हैं। प्रदर्शन में संघ अध्यक्ष निर्मल जोशी, वरिष्ठ अभिभाषक शिवनारायण कश्यप, प्रकाश रातड़िया, रमेशचंद्र बूंदीवाल, ओमसिंह चौहान, राधेश्याम सिखवाल, गोपालकृष्ण शर्मा सहित संघ सदस्य मौजूद थे।

पक्षकारोंने भी किया समर्थन

सोमवारको हुई हड़ताल का असर सबसे अधिक एक हजार पक्षकारों पर पड़ा। वकील नगर की किसी भी कोर्ट में नहीं पहुंचे। पक्षकारों को हड़ताल का कारण पता चला तो उन्होंने ने भी हड़ताल का समर्थन किया।

वकीलों की हड़ताल के कारण कोर्ट परिसर में खाली पड़ी अभिभाषकों की कुर्सी-टेबलें।

पांच गुना तक बढ़ी कीमतें

नोटरीएडवोकेट जोगेंद्रसिंह तोमर ने बताया अध्यादेश में स्टाम्प की कीमतें 5 गुना तक बढ़ाई गई हैं। इसका असर जनता की जेब पर पड़ना है। सरकार को यदि स्टाम्प से शासकीय खजाने की भरपाई करना है तो वह कुछ कीमत बढ़ा सकती थी परंतु सीधे पांच गुना बढ़त किसी भी हाल में सही नहीं है।