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सावधान ! बढ़ रहा है स्वाइन फ्लू

6 वर्ष पहले
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मंदसौरवासियोंको सावधान रहने की जरूरत है। जिले में स्वाइन फ्लू तेजी से बढ़ रहा है। दो हफ्ते में तीसरा मामला चुका है। आप सावधानी रखकर इस बीमारी से बच सकते हैं।

चार दिन पहले स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखने पर संजीत नाका निवासी रिटायर्ड व्यक्ति को चैकअप के लिए इंदौर के एमवाय अस्पताल भेजा था। जहां स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। उनके परिवार में एक अन्य सदस्य में सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण दिखने पर दवा दी है। सीएमएचओ ने विभाग से मास्क और दवा की अतिरिक्त मांग की है।

स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू के संक्रमण को काबू में करने के लिए मौसमी बीमारियों से बचाव और घरों के आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखने को कहा है। स्थिति यह है कि 27 जनवरी को नयापुरा निवासी महिला के रूप में स्वाइन फ्लू पॉजिटिव का पहला केस सामने आया। जिसे उदयपुर के महाराणा अस्पताल भेजा था। दो दिन बाद महिला के देवर में भी रोग के लक्षण दिखे। प्रारंभिक उपचार के बाद उसे उदयपुर भेजा हालांकि रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं रही। 28 जनवरी को ऐरा के व्यक्ति को स्वाइन फ्लू पॉजिटिव के तौर पर पुष्टि की। उसका उदयपुर में इलाज हो रहा है।

5 फरवरी को मिले लक्षण, इंदौर में हुई पुष्टि

ताजामामले में संजीत नाका निवासी रिटायर्ड व्यक्ति में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखे थे। 5 फरवरी को उन्हें इंदौर भेजा था। रिपोर्ट आने पर पॉजिटिव केस के रूप में पुष्टि हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम उनके घर पहुंची और परीक्षण के बाद एक सदस्य को प्रारंभिक लक्षण दिखने पर टेमी फ्लू दवा दी। उनकी हालत में सुधार है। बढ़ते आंकड़े ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। मेडिकल ऑफिसर डॉ. केएम कलवाड़िया के अनुसार जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू के अस्थायी वार्ड की व्यवस्था है। अस्पताल के डॉ. राकेश जैन का कहना है रोग से बचाव के लिए जागरूकता अभियान जारी है।

‘मास्क और दवाओं की अतिरक्ति डिमांड भेजी’

सीएमएचओडॉ. प्रदीप शर्मा का कहना है वैसे हमारे पास टेमीफ्लू दवा और सुरक्षा के लिए मास्क है लेकिन आवश्यकता के मान से विभाग को डिमांड भेजी है। ताजा मामले में संजीत नाका निवासी व्यक्ति इंदौर में पॉजिटिव हैं। रोग के संक्रमण से बचाव के लिए स्वच्छता जरूरी है। साथ ही लगातार बुखार, सर्दी-जुकाम होने पर समय पर जांच अवश्य कराएं जिससे की प्रारंभिक स्टेज में लक्षण रोके जा सकें।

स्वाइन फ्लू के लक्षण

{तेज बुखार।

{ ज्यादा ठंड लगना।

{ गला खराब होना।

{मांसपेशियों में दर्द।

{ तेज सिरदर्द होना।

{ खांसी कमजोरी।

ऐसेहोता है संक्रमण

{संक्रमित के खांसने-छींकने से।

{ संक्रमत द्वारा उपयोग उपकरण, बर्तन आदि से।

{ संक्रमित से हाथ मिलाने संपर्क में आने से।

यहसावधानी बरतें

{बार-बार साबुन से हाथ धोएं।

{ साबुन या सॉल्यूशन वायरस खात्म करने वाला हो।

{ नाक मुंह पर मास्क लगाएं।

स्वाइन फ्लू श्वसनतंत्र से संबंधित बीमारी है। यह ए-टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है। यह एच1 एन1 के नाम से जाना जाता है। यह वायरस हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश करता है। दरवाजे, फोन, कीबोर्ड या रिमोट कंट्रोल के जरिए भी यह फैल सकता है। इसका संक्रमण पीसीआर टेस्ट के माध्यम से पता चल सकता है। इसके वायरस में चिड़ियों, सूअरों इंसानों में पाया जाने वाला जेनेटिक मटेरियल भी रहता है। स्वाइन फ्लू होने के शुरुआती 48 घंटों के भीतर इलाज शुरू हो जाना चाहिए। इलाज कम से कम पांच दिन चलता है। इसमें मरीज को टेमीफ्लू टेबलेट दी जाती है।

यहभी अपनाएं- आयुर्वेदाचार्योंके अनुसार घरेलू नुस्खे से स्वाइन फ्लू का संक्रमण रोका जा सकता है। कपूर, तुलसी इलायची पीसकर मिला लें। यह मिश्रण हमेशा पास रखें थोड़े-थोड़े अंतराल पर सूंघते रहें।

स्वाइन फ्लू से जिला अस्पताल स्टाफ सदस्य अलर्ट हैं। ड्यूटी के दौरान डॉक्टर से लेकर नर्स तक मास्क पहनकर रोगियों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचा रहे हैं। पैथोलॉजी, ओपीडी वार्डों तक में ड्यूटी के दौरान मास्क पहना जा रहा है।