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उसके संग चली गई पिता की रोशनी

6 वर्ष पहले
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वोपिता की आंखों की रोशनी था। पिता को आंखों से दिखाई नहीं देने के कारण घर की सारी जिम्मेदारी उसी पर थी। यहां तक कि पिता को रोज दुकान से घर घर से दुकान लाना ले जाना। पिता की सेवा के लिए तैयार रहना उसका स्वभाव था। चित्तौड़गढ़ के पास हुई सड़क दुर्घटना ने ऐसे पुत्र को पिता से छीन लिया। सोमवार दोपहर को उसका पार्थिव शरीर बसेर कॉलोनी स्थित घर पहुंचा तो परिजनों का रो रो कर बुरा हाल था। मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार हुआ।

बसेर कॉलोनी निवासी युवा व्यापारी विपुल नाहर अपनेे मित्र भाजपा आईटी सेल सह संयोजक अंकित सोनी, विजय सोनी एवं बुआ के लड़के सौरभ नाहर के साथ शनिवार को नाकोड़ाजी दर्शन करने गए। वापसी में रविवार रात चित्तौड़ के पास स्थित चंदेरिया में दुर्घटना का शिकार हो गए। घटना में विपुल की मौत हो गई।

नवकारमंत्र के साथ श्रद्धांजलि सभा-युवा मौतसे समाज सहित सभी परिचित बहुत अधिक दुखी थे। यहां दाह संस्कार के बाद नवकार मंत्र का जाप हुआ और श्रद्धांजलि सभा हुई। इस विकट दुख की घड़ी में कोई भी दो शब्द कहकर दुख प्रकट नहीं कर पाया। सभा में नवकार मंत्र युवा मंच सदस्य, समाजजन सहित विपुल के मित्र गण मौजूद थे।

पिता की सेवा में ही कटता था दिन

विपुलजैन श्वेतांबर युवा मंच का सदस्य था। मंच अध्यक्ष हिम्मत डांगी ने बताया विपुल के पिता को दिखाई नहीं देता था। भाई विशाल नाहर संगीतकार होने से अधिकांशत: बाहर ही रहता था। इसलिए परिवार की पूरी जिम्मेदारी विपुल पर ही थी। वह प्रतिदिन पिता को भगत कॉम्पलेक्स स्थित जनरल स्टोर की दुकान पर लाता और ले जाता था। सभी मिलने वाले पिता भक्ति में विपुल की मिसाल दिया करते थे। विपुल ने हाल ही में कमोडिटी का व्यापार भी शुरू किया था। 4 अप्रैल को विपुल का विवाह बड़नगर में होने वाला था।

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विपुल नाहर