एमबीए पासआउट देखेगा भोले का मैनेजमेंट
नियमावली और दायित्व की गाइड लाइन बनेगी
सिटीरिपोर्टर | मंदसौर
पशुपतिनाथमंदिर का मैनेजमेंट अब एमबीए पासआउट के पास रहेगा। मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में मैनेजमेंट से ग्रेजुएट युवा को जिम्मेदारी देने पर के सहमति बन गई है। युवाओं के हाथों में प्रबंधन आने पर चर रहे विकास कार्यों में गति आने की संभावनाएं तो बढ़ेगी ही। व्यवस्थाओं में भी कसावट आएगी।
पशुपतिनाथ मंदिर प्रबंध समिति सहसचिव अनिल भट्ट के अनुसार मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में प्रबंधन के लिए एमबीए डिग्रीधारी युवाओं के चयन का प्रस्ताव पारित हो चुका है। जल्द नियुक्त को लेकर नियमावली और दायित्व की गाइड लाइन बनेगी। इसके बाद निर्धारित मापदंड मुताबिक चयन प्रक्रिया शुरू होगी।
पशुपतिनाथ मंदिर विकास के मास्टर प्लान, अक्षरधाम की तर्ज पर मंदिर विकास योजना के प्रोजेक्ट प्रबंधन की कमजोरी के चलते या तो शुरू ही नहीं हो सके या सही दिशा में आगे नहीं बढ़ पाए। मंदिर से जुडे छोटे-मोटे काम भी प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचते हैं। इन्हीं स्थितियों को देखते हुए मंदिर प्रबंधन एमबीए डिग्रीधारियों को जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया है। चयन मेरिट के आधार पर होगा।
पशुपतिनाथ प्रबंध समिति की बैठकों में मंदिर में होने वाले निर्माण के साथ श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए प्लानिंग तैयार होती है। मंदिर प्रबंधन के लिए 1 करोड़ का सालाना बजट पारित करता है। इसके अलावा बाबा के खातों में 8 करोड़ से ज्यादा का बैक बैलेंस है।
15हजार हर माह बढ़ जाएगा खर्च- एमबीएपासआउट को प्रबंधक के रूप में नियुक्त करने पर मंदिर समिति पर करीब 15 हजार रुपए प्रतिमाह का भार बढ़ जाएगा। वर्तमान प्रबंधक को 5 हजार रुपए मानदेय दिया जा रहा है। एमबीएम पासआउट को 20 हजार रुपए प्रतिमाह तक देना पड़ सकता है।
पशुपतिनाथ मंदिर समिति में मंदिर प्रशासक सहित प्रबंधक के तीन पद है। जिम्मेदारी से भरे पदों होने के कारण और मंदिर व्यवस्था का जिम्मा प्रशासन के पास होने के कारण इन पर प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत होने पर ही दायित्व सौंपा जाता है। ये कर्मचारी और अधिकारी मंदिर की व्यवस्था मानसेवी के रूप में संभालते हैं लेकिन कम अधिकार और ज्यादा जिम्मेदारी होने से कई मौकों पर मंदिर समिति की बैठक का इंतजार करते हैं।
पशुपतिनाथ