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सनातन धर्म की अनदेखी के नजर रहे दुष्परिणाम

6 वर्ष पहले
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मंदसौर| वैदिकऔर सनातन धर्म की परंपरा की अनदेखी से मानव में विकास पैदा हो रहे हैं। बाहरी और आंतरिक पवित्रताओं का ध्यान नहीं रखने से मानव असाध्य बीमारियों का शिकार हो रहा है। मेनपुरिया आश्रम में चूड़ामणि प्रवचनमाला समापन पर संत रमणानंद महाराज ने कहा मन की पवित्रता के सत्संग, तन की पवित्रता के लिए स्नान, ध्यान जरूरी है। आसक्त मानव को संसार और सत्संगी को संत सान्निध्य ही अच्छा लगता है। संत धीरेशानंद महाराज ने कहा जब तक मानव जीवन रहे सत्संग करना चाहिए। सत्संग में नित्यानंद महाराज, देवानंद महाराज मौजूद थे। संतों का शॉल श्रीफल से लोकन्यास अध्यक्ष प्रहलाद काबरा, सचिव राधेश्याम सिखवाल, जगदीशचंद सेठिया, विनोद गर्ग, राधेश्याम मालवीय, पुजारी विष्णु गिरी आदि ने बहुमान किया।