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गायब हो गए 80 से ज्यादा प्लॉट

7 वर्ष पहले
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घरबनाने का सपना देखने वाले 80 से अधिक शासकीय कर्मचारी 13 साल से अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। इनके प्लॉट कागजों में तो हैं किंतु जमीन पर गायब हो गए। कर्मचारियों में से कई रिटायर हो गए तो कुछ होने वाले हैं। 2001 में कर्मचारी आवास कॉलोनी में लॉटरी से भूखंड पाने वाले कर्मचारी कहने को तो प्लॉटों के मालिक हैं किंतु कॉलोनी में इनके प्लॉट ही नहीं हैं। 80 से ज्यादा भूखंडधारी राज्य आवास निगम, जिला प्रशासन और नपा के बीच उलझे हैं। ऐसा कॉलोनी के लेऑउट में हुई गड़बड़ी के कारण हुआ।

750प्लॉटों के लिए हुई थी लॉटरी

2001में राज्य कर्मचारी आवास निगम ने विकसित कर्मचारी आवास कॉलोनी में 750 प्लॉट काटकर 2008 में लॉटरी से आवंटन किया था। अधिकतर कर्मचारी कॉलोनी में मकान बनाकर रहने लगे किंतु 80 से ज्यादा कर्मचारी 13 सालों से भटक रहे हैं। ज्यादातर ने भूखंड की पूरी राशि जमा करा दी। उन्हें कागजों में प्लॉट का आवंटन भी मिल गया। रजिस्ट्री भी हो गई लेकिन प्लॉट नहीं मिले।

नपा नोडल एजेंसी, जनसुविधा जुटाई

नपासीएमओ हिमांशु भट्ट का कहना है कर्मचारी आवास कॉलोनी में नपा केवल नोडल एजेंसी है। कॉलोनी के विकास के बाद नपा ने आवास निगम के नक्शे के मुताबिक सड़क, बिजली के पोल, नाली निर्माण का काम किया। कॉॅलोनी के भूखंडधारी, वैध दस्तावेजों के साथ भूखंड नामांतरण भवन निर्माण का आवेदन लगाते हैं तो नपा भवन निर्माण की अनुमति जारी करती है। प्लॉट की रजिस्ट्री नपा का अधिकार क्षेत्र नहीं है।

आपत्तियों के बाद बढ़ी उलझन

मप्रराज्य आवास निगम भोपाल के रजिस्ट्रीकरण प्रभारी अशोक शर्मा का कहना है निगम ने मंदसौर में कर्मचारी आवास कॉलोनी की योजना 1996 से बनाई थी। जरूरी विकास कार्य होने के बाद 2001 से भूखंडों का आवंटन शुरू कर दिया। 750 भूखंडधारियों में से ज्यादातर को भूखंड दिए जा चुके हैं। कुछ भूखंडों में समीप की भूमि के किसानों ने आपत्ति लगा दी। मामला राजस्व विभाग तक गया। इसके बाद सीमांकन को लेकर उलझन बनी हुई है। विभाग से पूरी योजना के साथ कॉलोनी विकास का प्लान तैयार किया था।

सीमांकन में चूक का नतीजा भुगत रहे लोग

प्रभाविनोद ओझा ने बताया आवासीय कॉलोनी विकसित होने के बाद 2001 में कॉलोनी के ले आउट के आधार पर ड्रॉ से भूखंड आवंटन हुआ था। तब भूखंडधारियों ने आवास निगम के खाते में राशि जमा करा दी थी। बाद में कॉॅलोनी विक