400 व्यापारियों के पंजीयन हो गए निरस्त
वाणिज्यिककर विभाग ने जनवरी में 400 व्यापारियों के पंजीयन निरस्त कर दिए हैं। हालांकि अधिकारी ऐेसे किसी आंकड़े से इनकार कर रहे हैं। व्यापारी अधिकारियों के डर से मुंह नहीं खोल रहे। साथ ही व्यापारियों को फार्म 49 की परेशानी से मुक्ति नहीं मिली है।
व्यापारियों के मुताबिक विभाग ने ऐसे व्यापारी जो तीन माह का रिटर्न जमा नहीं करवा पाएं या निर्धारित समय के बाद जमा करवाया उनका पंजीयन निरस्त किया है। ऐसे में व्यापारी को पंजीयन नवीनीकरण के लिए दो से तीन हजार रुपए खर्च करना पड़ रहे हैं। यही स्थित फार्म 49 को लेकर है। विभाग व्यापार की लिमिट बार-बार शून्य कर देता है। जिसे री सेट कराने के लिए व्यापारियों काे विभाग में जाना पड़ता है। कर सलाहकार संघ अध्यक्ष सोहनलाल कोठारी ने बताया फाॅर्म 49 के लिए बार-बार विभाग जाना पड़ रहा है। फार्म 49 में लिमिट क्वार्टर स्टेज तक खत्म हो जाती है। रिटर्न व टैक्स न देने पर लिमिट जीरो कर दी जाती है। वाणिज्यिककर अधिकारी इंद्रपाल सिंह ठाकुर ने बताया दरअसल रिटर्न देने का समय निर्धारित है। ड्यू डेट तक टैक्स व रिटर्न सबमिट कराना होता है तो सिस्टम खुद लिमिट जीराे कर देता है। मंदसौर में इतनी संख्या में व्यापारियों के पंजीयन निरस्त होना अब तक मेरी जानकारी में नहीं आया। फार्म 49 संबंधी कोई परेशानी नहीं है।
क्या हो रहा वाणिज्यिक कर कार्यालय में
प्रदेश वाणिज्यिक कर विभाग ने फार्म 49 की सीमा तय की है लेकिन व्यापारियों का कहना है स्थानीय वाणिज्यिक कर कार्यालय द्वारा व्यापारियों की फार्म 49 की सीमा काे बार-बार निरंक लिमिट कर दिया जाता है। जिससे व्यापारियों को माल मंगाने एवं भेजने में विलंब होता है, विभाग में जाना पड़ता है। व्यापार बाधित होता है। परिणामस्वरूप व्यापारी वर्ग बिना पक्के बिल एवं बिना फार्म 49 को माल मंगाने पर मजबूर हाेता है। फलस्वरूप शासन के कर राजस्व को हानि होती है।
क्या है फाॅर्म 49
मध्यप्रदेश राज्य में माल काे प्रवेश कराने के लिए व्यापारियों को 66 वस्तुओं पर एवं मध्यप्रदेश से बाहर भेजने के लिए 13 वस्तुओं पर फाॅर्म 49 वाणिज्यिक कर जांच-चौकियों पर प्रस्तुत कर उन्हें पास कराना अनिवार्य है।
क्या होना चाहिए
1. फाॅर्म 49 की प्रक्रिया सरलीकृत होना चाहिए।
2. बिना किसी सीमा के फाॅर्म 49 डाउनलोड करने की सुविधा हाेना चाहिए।
3. निरंक लिमिट के प्रावधान को तत्काल हटाया जाए।
4. विवरणियां देर से दाखिल होने पर भी पंजीयन निरस्त न किए जाएं।