इंस्टाॅलेशन के लिए नहीं आया डायलिसिस यूनिट का केमिकल
जिला अस्पताल में 26 जनवरी को डायलिसिस यूनिट भवन का शुभारंभ हो गया लेकिन 19 दिन बाद भी मशीनों का संचालन शुरू नहीं हुआ है। मशीनों की इंस्टालमेंट के लिए जरूरी सोल्यूशन अब तक नहीं मिला है। कंपनी की ओर से भेजा टेक्नीशियन मशीन फिटिंग के बाद अब तक नहीं लौटा। ऐसे में मशीनें यूनिट में पड़ी और उपयोग नहीं आ रहीं। किड़नी रोगियों को 1200 से 1600 रुपए तक में प्राइवेट अस्पतालों में ट्रीटमेंट लेना पड़ रहा है।
सिविल सर्जन डॉ. एके मिश्रा ने कहा जबरन लेटलतीफी हो रही है। हीमो डायलिसिस मशीन बनाने वाली कंपनी का टेक्नीशियन दोबारा यहां नहीं आया, वह केमिकल लाने का कहकर गया है। मैंने कंपनी के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजकर जानकारी भेज दी है। विभाग ने 20 फरवरी तक गाइड लाइन तय की है, इसके बाद कार्रवाई के तौर पर जरूरी कदम उठा सकेंगे।
30 दिसंबर को ही आ गईं थी मशीनें
30 दिसंबर 2015 को स्वास्थ्य विभाग की ओर से पांच हीमो डायलिसिस मशीनें मिली। अब तक स्टोर रूम से मशीनों को विमलादेवी यूएन भाचावत हीमो डायलिसिस यूनिट तक शिफ्टिंग हुई है। ट्रेंड डॉक्टर डॉ. केएम कलवाड़िया और 2 नर्सिंग स्टाफ के बाद मशीन उपयोग नहीं आ रही।