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नीलगाय को वन्यप्राणी सूची से हटाने में की हां

5 वर्ष पहले
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गांधीसागर से लगी पंचायतों से फसलों को नुकसान पहुंचाने वाली नीलगाय को वन्यप्राणी की सूची प्राणी की सूची से हटाने का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजे गए हैं। नीलगाय को वन्यप्राणी की सूची से बाहर रखने के प्रस्ताव पर नीमच की 35 व मंदसौर की 60 सहित 95 पंचायतों ने सहमति जताई है। स्वीकृति पर किसान नीलगाय को मार सकेंगे।

गांधीसागर अभयारण्य से लगी पंचायतों में किसान नीलगायों द्वारा फसल को नुकसान पहुंचाने से काफी त्रस्त हैं। एक अनुमान के अनुसार अभयारण्य क्षेत्र में 3 हजार से अधिक नीलगाय हैं। ये हर साल गांधीसागर से लगे गांवों में बड़े पैमाने पर फसल बर्बाद कर देती हैं। इससे मनासा-रामपुरा क्षेत्र के 30 गांव के लोग वर्षों से परेशान हैं। इस समस्या से देश के अन्य इलाकों में भी है। इसके चलते छह महीने पहले केंद्र सरकार ने नीलगाय को वन्यप्राणी की सूची से हटाने के लिए मध्यप्रदेश की पंचायतों से लिखित सहमति मांगी थी। शासन ने पंचायतों से सहमति मंगाई। नीमच और मंदसौर जिले में वन विभाग ने सर्वे कर प्रस्ताव बनाए। नीमच जिले में 35 पंचायतों में सर्वे हुआ और ठहराव-प्रस्ताव तैयार हुआ। इसी तरह मंदसौर जिले में 60 पंचायतों ने नीलगायों को वन्य प्राणी की सूची से हटाने के प्रस्ताव पर सहमति दी है।

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