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मौसम की मार, अफीम की फसल उखाड़ने की गुहार

5 वर्ष पहले
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नारकोटिक्स कमिश्नर राजेश पुरी मंगलवार को मंदसौर में थे। अधिकारियों ने उन्हें अफीम फसल की हकीकत बताते हुए अफीम उखड़वाने के लिए बढ़ रहे किसानों के आवेदन की जानकारी दी। कांग्रेस नेता भी पहुंचे। उन्होंने कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर वर्तमान अफीम नीति की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े करते हुए किसानों के लिए राहत मांगी। कमिनश्नर ने साफ किया- विभाग नीति पर अमल करता है बनाता नहीं। अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। पूरी कार्रवाई नीति के अनुसार ही होगी। हां यह जरूर है किसानों की समस्या को मंत्रालय तक पहुंचा दिया जाएगा।

मंगलवार सुबह 11.45 बजे नारकोटिक्स कमिश्नर पुरी व सहायक नारकोटिक्स कमिश्नर महेश सोनी नारकोटिक्स कार्यालय पहुंचे। खंड 3 डीओ कार्यालय पर उन्होंने सेटेलमेंट से तौल तक की जानकारी ली। कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रकाश रातड़िया, पूर्व विधायक नवकृष्ण पाटिल, जिला उपाध्यक्ष महेंद्र गुर्जर, जनपद उपाध्यक्ष परशुराम सिसौदिया किसानों के साथ कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कमिश्नर पुरी को अफीम को लेकर किसानों को आ रही समस्या से अवगत कराया। जिलाध्यक्ष रातड़िया ने कमिश्नर पुरी को बताया दो सालों से मौसम के चलते अफीम फसल खराब हो रही है। किसानों को पट्‌टे कटने का डर सता रहा है। एेसी स्थिति में नीति में कुछ संशोधन किया जाना चाहिए। कमिश्नर ने साफ कहा नीतियां मंत्रालय से बनती है विभाग केवल उन पर अमल करता है और करवाता है। फिलहाल नीति अनुसार ही काम करना होगा। आपकी समस्या मंत्रालय तक पहुंचाई जाएगी। फिर जैसे निर्देश मिलेंगे उसका पालन होगा।

200 से अधिक आवेदन आए-मौसम प्रभावित फसल उखड़वाने जिला मुख्यालय नारकोटिक्स विभाग के पास अब तक 200 आवेदन आ चुके हैं। इनकी संख्या हर रोज 8 से 10 बढ़ रही है। इन किसानों ने डोडों पर चीरा भी नहीं लगाया है। किसानों का मानना है कि चीरा लगा दिया तो नीति के तहत तय अफीम विभाग को देना पड़ेगी, जो संभव नहीं है।

यहां शुद्ध, अफीम फैक्टरी से बताते हैं मिलावट
अफीम की शुद्धता को लेकर कांग्रेस नेताओं ने सवाल किए। उन्होंने कमिश्नर को बताया विभाग जो अफीम किसानों से लेता है वह यहां शुद्ध रहती है फिर फैक्ट्री में जाकर मिलावट क्यों निकलती है। उन्होंने कहा यहां अफीम में केवल पानी की मात्रा देखने के उपकरण है इसलिए ऐसा होता है। कई बार जो अफीम संदिग्ध होती है वह फैक्ट्री में बिलकुल शुद्ध बता दी जाती है। इस पर कांग्रेस नेताओं ने जांच के उपकरण मंदसौर में लगवाने की मांग की।

डोडे चोरी का भी उठा मुद्दा
कांग्रेस नेताओं ने किसानों की मुख्य समस्या हरे डोडे चोरी होने की बात कमिश्नर को बताई। उन्होंने साफ कह दिया डोडे चोरी होने पर विभाग कुछ नहीं कर सकता आप लोग पुलिस को सूचित करिए। यदि पुलिस मदद नहीं करती तो मुझे बताइए मैं एसपी से बात करता हूं।

ट्रैक्टर से ना हकवाई जाए
नीति अनुसार यदि कोई किसान फसल हकवाता है तो उसकी फसल ट्रैक्टर से हकवाई जाती है। वर्तमान में फसल की स्थिति देखते हुए कांग्रेस नेताओं ने फसल ट्रैक्टर से नहीं हकवाने की मांग की। उन्होंने कहा ट्रैक्टर से फसल हकवाने पर सब कुछ खत्म हो जाता है। मौसम की मार देखते हुए किसानों को छूट मिलना चाहिए। ताकि उनका नुकसान कुछ कम हो।

सरकार अफीम काश्तकारों के प्रति संवेदनशील नहीं

पिपलियामंडी |
सरकार अफीम काश्तकारों के प्रति संवेदनशील नहीं है। इस साल अफीम खेती में रोग व बेमौसम बारिश से कई किसान अफीम हांकने को मजबूर हैं। ऐसे में सरकार किसानों को डाेडाचूरा व पोस्तादाना लेने दें या नुकसान का 3 लाख रुपए प्रति किसान हर्जा-खर्चा दे। समस्याओं को लेकर 11 फरवरी को सुबह 11 बजे से नीमच डीएनसी कार्यालय का घेराव करेंगे। यह बात पूर्व विधायक व आम आदमी पार्टी नेता कल्पना परुलेकर ने कही। वे पिपलिया नप सभागार में मीडिया से चर्चा कर रही थी। उन्होंने कहा कांग्रेस के सांसद व राज्यसभा सदस्य इस मामले में चुप्पी साधे हैं जबकि उन्हें पीएम से चर्चा करना चाहिए। इस मुद्दे पर भाजपा-कांग्रेस नेता सोए हैं। जल्द कलेक्टोरेट का घेराव करेंगे। आप नेता श्रीराम पाटीदार मौजूद थे।

ग्राम मजेसरा में अफीम की फसल दिखाते सिसौदिया।

अफीम फसल पर बार बार पड़ रही मौसम की मार विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। कही फसलों में डोडे ही नहीं आए, कहीं बोर के बराबर डोडे हैं। जहां डोडे पूरे हैं उनमें अफीम निकलने की संभावना नहीं है। मजेसरा निवासी फुंदासिंह ने बताया छोटे छोटे अफीम के पौधों पर फूल आ गए हैं। अब डोडे लगे तो भी अफीम का उत्पादन कम होगा, क्योंकि पत्ते पीले पड़ गए हैं। ग्राम साबाखेड़ा निवासी नंदलाल शिवलाल एवं बादाखेड़ी निवासी हारून मोहम्मद ने बताया फसल पर इस बार दो गुना खर्च हुआ है फिर भी फसल बचने के बिलकुल आसार नहीं है।

यह है फसल की हकीकत: छोटे पौधे, फूल आ गए
कमिश्नर बोले-हम कुछ नहीं कर सकते, समस्या मंत्रालय तक पहुंचा देंगे
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