आयुर्वेदिक अस्पताल से दूर रोगी
शहरीआबादी से दूर रेवास देवड़ा रोड पर बनाए जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में रोगी नहीं पहुंच रहे हैं। अस्पताल में पंचकर्म थेरेपी सहित अन्य सुविधाएं हैं। कई उपकरण भी चुके हैं लेकिन उनका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा। रोज आने वाले मरीजों की आैसत संख्या 10-11 से आगे नहीं बढ़ रही। डॉक्टर सहित स्टाफ सदस्य के कई पद खाली हैं। भवन में पेयजल के लिए नल लगा है अन्य इंतजाम नहीं हैं। सुरक्षा के नाम पर बाउंड्रीवॉल आैर सुलभता के लिए एप्राेच रोड भी नहीं बन सकी।
पांच विभिन्न चिकित्साआें का सम्मिश्रण कहे जाने वाले पंचकर्म की सुविधा जिला आयुर्वेद अस्पताल में है लेकिन एक भी व्यक्ति चिकित्सा लाभ लेने नहीं पहुंचा। कई लोग नगर में निजी तौर पर संचालित केंद्रों में शुल्क देकर पंचकर्म थैरेपी करा रहे हैं। जानकारी के अभाव में लोग यहां पहुंच नहीं रहे। जुलाई में आयुर्वेद अस्पताल भवन संसाधनों के साथ लोकार्पित हुआ था। यहां 2 पलंग हैं। 14 सदस्यीय स्टाफ में 2-2 पद डॉक्टर, कंपाउंडर, दवासाज, मैथ्योर तथा 4 पद नर्स, एक प्यून, 2 स्वीपर पद स्वीकृत हैं। इनके मुकाबले यहां 1 डॉक्टर, 2 दवासाज, 2 स्वीपर कार्यरत हैं।
पंचकर्म उपचार के लिए आए उपकरण।
जिला आयुर्वेद अस्पताल भवन को बाउंड्रीवॉल एप्रोच रोड का इंतजार।
साधन, संसाधन हैं लेकिन स्टाफ नहीं
^जिलाआयुर्वेद अस्पताल में साधन, संसाधन हैं लेकिन स्टाफ में कई पद रिक्त हैं। यहां पंचकर्म थैरेपी प्रारंभ की है, कई मशीनें भी चुकी हैं। रोगियों के लिए पेयजल संबंधी परेशानी नहीं रहेगी। फिलहाल काफी कम लोग इलाज कराने रहे हैं। शहर से कुछ दूरी को इसकी वजह नहीं मानता, जानकारी के अभाव में कई लोग यहां नहीं रहे। अधिकांश लोग जिला अस्पताल में आयुर्वेद कक्ष, अभिनंदन केंद्र स्थित स्वास्थ्य केंद्र जाते हैं। स्टाफ पदों के संबंध में शासन को पत्र लिखा है। ऋषभजैन, जिलाआयुष अधिकारी मंदसौर
जिला आयुर्वेद अस्पताल लेकिन रोगियों की संख्या नाममात्र की