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शहर से बाहर ही लगता है दरबार
यूं तो अंतरसिंह दरबार को पूरे जिले में दरबार लगाकर कांग्रेस को मजबूत करने का जिम्मा मिला हुआ है, लेकिन उन्हें शहरी तो क्या ग्रामीण क्षेत्रों के नेताओं से भी मिलकर चलने में दिक्कत रही है। जो नेता कभी दरबार के दरबार को सजाने में पूरे जी जान से जुटे नजर आते थे, वो ही अब दूसरे खेमों में दम भरते नजर आते हैं। दरबार की राह को मुश्किल बनाने में हेमंत पाल कोई कसर नहीं छोड़ते हैं और यही वजह है कि वो हर उस जगह जाकर अपनी सक्रियता दिखाने में लगे रहते हैं जहां से दरबार की चमक फीकी पड़ सके। सत्तू पटेल जैसे विश्वसनीय साथी भी अब पाल के पाले में चले गए हैं। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की कड़ी माने जाने वाले जीतू पटवारी जब से विरोधी हवा के बावजूद विधायक हुए हैं तभी से किसी नेता को भाव नहीं देना तय कर चुके हैं। यही वजह है कि जिलेभर में कमान संभालने के बजाय दरबार का दरबार सिर्फ महू और उसके आसपास सिमटता जा रहा है और दूसरा खेमा यही हिसाब लगा रहा है कि दरबार का दरबार थोड़ा और सिमट जाए तो वो कुर्सी खींचें। {खबरची