कर्मयोग जीवन का सार- डॉ मिश्रा
कर्मयोगजीवन का सार है प्रत्येक व्यक्ति को छात्र जीवन से ही कर्मयोग जीवन में ढालने का प्रयास करना चाहिए। उक्त विचार शासकीय महाविद्यालय मुरैना के प्रोफेसर डॉ जेके मिश्रा ने व्यक्त किए। वे शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय दतिया के व्यक्तित्व विकास प्रकोष्ठ के तत्वावधान में आयोजित महापुरुषों की प्रेरक प्रसंग पर बोल रहे थे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शासकीय महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ विजय शर्मा ने संत गुरू घासीदास के चिंतन पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का संचालन डॉ एमपी शर्मा ने किया एवं आभार प्रदर्शन डॉ किशोर अरोरा ने किया। इस अवसर पर जिला संयोजक डॉ रतन सूर्यवंशी, डॉ निलय गोस्वामी, डॉ आरएस लाहौरिया, आदि उपस्थित थे।