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- जितना हल्ला मच रहा है, उतनी गंभीर बीमारी नहीं स्वाइन फ्लू: सिविल सर्जन
जितना हल्ला मच रहा है, उतनी गंभीर बीमारी नहीं स्वाइन फ्लू: सिविल सर्जन
स्वाइन फ्लू का इलाज
होम्योपैथी
आयुर्वेद
स्वाइन फ्लू हो, इसके लिए क्या करें
शुरुआती लक्षण
स्वाइनफ्लू बीमारी ने मुरैना में दस्तक दे दी है लेकिन अस्पताल प्रबंधन बचाव रोकथाम के लिए गंभीर नहीं हैं। दो मरीजों में फ्लू की पुष्टि हुई है। इसके बावजूद सिविल सर्जन डॉ. सियाराम शर्मा बचकाना बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा स्वाइन फ्लू इतनी गंभीर बीमारी नहीं है, जितना हल्ला मचाया जा रहा है। वहीं स्वाइन फ्लू के लिए बनाए गए वार्ड में तैनात डॉक्टरों-स्वास्थ्यकर्मियों का ही तो वैक्सीनेशन कराया गया मास्क टेमीफ्लू टैबलेट दी गई।
जिला कलेक्टर शिल्पा गुप्ता ने एक हफ्ते पहले ही बैठक लेकर जिला अस्पताल प्राइवेट नर्सिंग होम संचालकों को निर्देश दिए थे कि इस ओर गंभीर रहता है। बावजूद इसके ढील बरती जा रही है। अस्पताल में आने वाले स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों की जांच करने के लिए तैनात डॉक्टरों, नर्सों पैरामेडिकल स्टाफ का ही वैक्सीनेशन नहीं कराया गया है। चेहरे पर लगाने वाले एन-95 मास्क भी स्टाफ को नहीं दिए गए हैं। कर्मचारियों का मानना है कि जब हम ही बीमारी से सुरक्षित नहीं रहेंगे तो मरीजों का चेकअप कैसे करेंगे। शहर के कब्रस्तान क्षेत्र में रहने वाले रिक्शे वाले रहमान खान को स्वाइन फ्लू है। वह एक निजी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचा था।
अच्छा खाए-पिएं, योग करें तो नहीं होगा स्वाइन फ्लू
^स्वाइन फ्लू इतनी गंभीर बीमारी नहीं है, जितना कि हल्ला मचाया जा रहा है। स्टाफ के लिए अभी दवा नहीं है, केवल मरीजों के लिए है। लोग इससे बचाव रखें, अच्छा खाएं-पिएं, योग करें तो स्वाइन फ्लू नहीं होगा।\\\'\\\' डा.सियारामशर्मा, सिविल सर्जन जिला अस्पताल मुरैना
ऐसे करें बचाव: {4-5तुलसी के पत्ते, 5 ग्राम अदरक, चुटकी भर काली मिर्च पाउडर और इतनी ही हल्दी को एक कप पानी या चाय में उबालकर दिन में दो-तीन बार पिएं। {गिलोय (अमृता) बेल की डंडी को पानी में उबाल या छानकर पिएं।{आधा चम्मच हल्दी पौन गिलास दूध में उबालकर पिएं।
कैसे करें बचाव: फइन्फ्लुएंजाइनम-200की चार-पांच बूंदें, आधी कटोरी पानी में डालकर सुबह-शाम पांच दिन तक लें। इसके साथ सल्फर 200 लें। इससे इम्यूनिटी बढ़ेगी और स्वाइन फ्लू नहीं होगा।
{जब भी खांसी या छींक आए, रूमाल या टिश्यू पेपर यूज करें। {थोड़ी-थोड़ी देर में हाथ साबुन और पानी से धोते रहें। {लोगों से मिलने पर हाथ मिलाने, गले लगने या चूमने से बचें। {शुरुआती लक्षण पर डॉक्टर से संपर्क करें।
ये रहें सावधान
5साल से कम उम्र के बच्चे, 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग गर्भवती महिलाएं। जिन लोगों को निम्न में से कोई बीमारी है, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
{फेफड़ों,किडनी या दिल की बीमारी
{मस्तिष्क संबंधी; न्यूरोलॉजिकल
{कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग
{डायबिटीज
{ऐसे लोग जिन्हें पिछले 3 साल में कभी भी अस्थमा की शिकायत रही हो या अभी भी हो।
{शुरुआती लक्षण में डॉक्टर की सलाह लें।
{गर्भवती महिलाओं का प्रतिरोधक तंत्र; इम्यून सिस्टम, शरीर में होने वाले हॉरमोन संबंधी बदलावों के कारण कमजोर होता है। खासतौर पर गर्भावस्था के तीसरे चरण यानी 27वें से 40वें सप्ताह के बीच उन्हें ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है।
{गले में खराश लगातार बढ़ना।
{सिर में भयानक दर्द।
{उनींदे रहना, ज्यादा थकान होना।
{मांसपेशियों में दर्द या अकड़न होना।
{कफ और कोल्ड, लगातार खांसी।
{नाक का लगातार बहना, छींक आना।