बारिश से गिरा पारा, सर्दी बढ़ी
शुक्रवार-शनिवार को 15 घंटे में रुक-रुककर मूसलाधार बारिश से 66 हजार हेक्टेयर असिंचित रकबे में खड़ी फसल को मिला जीवनदान।
भास्करसंवाददाता| मुरैना
शुक्रवारदेर रात से शुरू हुई बारिश से अंचल में सर्दी बढ़ गई। न्यूनतम अधिकतम तापमान घटने से ठिठुरन पैदा हो गई। वहीं बारिश के साथ आसमान से आई आपदा से जिले के पोरसा पहाड़गढ़ के रकैरा में दो लोगों की मौत हो गई। आकाशीय बिजली से एक बाड़े में बंधी सात बकरियों भी मौत हुई है। साथ ही बारिश के साथ एक-दो जगह ओले भी गिरे हैं। वहीं कृषि वैज्ञानिकों ने बारिश को फसलों के लिए फायदेमंद बताया है।
सातबकरियों की आकाशीय बिजली से मौत :रकैरा गांव पहाड़गढ़ में भी तेज बारिश के बीच आकाशीय बिजली गिरी। जिससे रामवीर पुत्र हाकिम की तबेले में बंधीं सात बकरियां मौत का शिकार हो गईं।
सहसराममें गिरे ओले: पहाड़गढ़क्षेत्र के सहसराम में रात को डेढ़ घंटे ओले गिरे। इस मामले में जौरा के नायब तहसीलदार चंद्रमोहन शर्मा से जानकारी लेने पर स्पष्ट हुआ कि क्षेत्र से ऐसी कोई सूचना उनके पास नहीं आई है। जबकि ओलावृष्टि की पुष्टि क्षेत्रीय लोगों ने की है।
तीन दिन में 13 डिग्री गिरा पारा
मौसममें आए जबरदस्त बदलाव को यहां से समझा जा सकता है कि पारा तीन दिन में 13 डिग्री तक गिर गया। 11 दिसंबर को मुरैना का अधिकतम तापमान जहां 28 डिग्री सेल्सियस था वहीं 13 दिसंबर को यह घटकर मात्र 15 डिग्री सेल्सियस रह गया। इससे ठंड और बढ़ गई।
बारिश फसलों के लिए बहुत फायदेमंद है
^यह बारिश फसलों के लिए बहुत फायदेमंद है। जहां सिंचाई का साधन नहीं है, वहां के लिए तो यह अमृत बरस रहा है। इससे सरसों को बढ़वार अच्छी आएगी। लेकिन जहां अभी बोवनी नहीं की है, वह लेट वह और लेट हो जाएगी। मौसम एक-दो दिन तो इसी प्रकार का रहेगा। डाॅ.एसएसतोमर, एसोसिएटडायरेक्टर आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र मुरैना
21 एमएम हुई बारिश
>शुक्रवार-शनिवारकी मध्यरात्रि से सुबह 8 बजे तक 9 मिलीमीटर।
> शनिवार की सुबह आठ से दोपहर 2.30 बजे तक 12 मिलीमीटर।
> 21 मिलीमीटर बारिश दोपहर तक हो चुकी थी मुरैना शहर में।
एमएस रोड पर बारिश से बचकर जाते वाहन सवार।
हाईवे पर तेज बारिश के बीच वाहन चालक हेडलाइटस जलाकर चले।
असिंचित रकबे की फसलों के लिए अमृत है बारिश
^यह बारिश अरहर, सरसों, चना, गेहूं आदि सभी फसलों के लिए बहुत फायदेमंद है। क्