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लोक अदालत ने लौटाईं बिखरे परिवारों की खुशियां, 40 हजार 232 प्रकरण िनपटे
बिजली, बैंक समेत राजस्व के मामले भी निपटे लोक अदालत में। बिजली से संबंधित मामलों का निराकरण होने पर मायूस लौटे पक्षकार।
भास्करसंवाददाता| मुरैना
दुर्गापुरीजौरा में वर्ष 2012 में मुंगावली से ब्याह कर आई नीरज कुमारी को ससुराल में आते ही झगड़ों का सामना करना पड़ा। नीरज ने ससुरालीजनों से चले विवाद के बाद अंतत: एक साल बाद ही अपने मायके में रहना शुरू कर दिया। वे पिछले एक साल से अपनी ससुराल नहीं गईं, लेकिन शनिवार को लोक अदालत ने उनकी गृहस्थी फिर से बसा दी। केवल इंद्रसिंह-नीरज ही नहीं, बल्कि देवेंद्र और पूनम, अजयशंकर रीना नाक दंपत्ति भी लोक अदालत में हुए समझौते के बाद हसी-खुशी घर के लिए रवाना हुए। सबलगढ़ में 27 जोड़ों ने एक समझौते के बाद एक-दूसरे को माला पहनाकर फिर से गृहस्थी बसाई।
बिजलीके बकायदार बोले-हमारा मामला नहीं निपटा
मुरैनागांव से पप्पू राजौरिया ने अपना बिजली बिल दिखाया जो श्रीसरन पुत्र दुर्गा प्रसाद के नाम से था। इसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि 11800 में से 9000 रुपए वे 30 मई 2014 को जमा करा चुके हैं। लेकिन अब फिर से 12992 रुपए का बिल बिजली कंपनी ने दे दिया है। जबकि आज लोक अदालत में अधिकारियों से कहने पर भी निपटारा नहीं हो रहा है। इसी प्रकार रामलखन डंडौतिया निवासी मुरैना शांतिबाई निवासी गंगाराम का पुरा भी मायूस होकर लौट गए।
बारिश ने पैदा किया खलल
जिलान्यायालय में आयोजित लोक अदालत के दौरान तेज बारिश से अदालत परिसर में आए पक्षकारों को परेशानी हुई। बारिश ने यहां अदालत परिसर में लगाए गए टैंट पूरी तरह भिगो दिए, जिसके कारण उनमें बैठे बैंक आदि मामलों के निपटारे के लिए बैठे कर्मचारियों को वहां से उठना पड़ा।
इस प्रकार थीं खंडपीठ
>20 खंडपीठ मुरैना में थीं।
> 14 खंडपीठ अंबाह में बनीं।
> 10 खंडपीठ जौरा में रहीं।
> 09 खंडपीठ सबलगढ़ में थीं।
सबलगढ़ मंे निपटे 12 हजार प्रकरण
>सबलगढ़ लोक अदालत में 12,000 प्रकरणों का निराकरण किया गया।
> इसमें क्लेम केस के 12 प्रकरण थे, जिनमें 18 लाख रुपए स्वीकृत हुए।
> एमपीईबी के 24 प्रकरण थे, जिनमें साढ़े 4 लाख रुपए का बिल वसूल किया गया।
> बैंक संबंधी 40 प्रकरण थे, जिनमें 6.50 लाख रुपए की वसूली हुई।
> जल संसाधन विभाग के 20 प्रकरण थे, जिनमें 3,10,805 रुपए की वसूली की गई।
> नगरपालिका के मामलों में 37 हजार रुपए